रायपुर। Local Editorial: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी रेडियो वार्ता 'लोकवाणी' में नारी सशक्तीकरण पर विशेष बल दिया है। इसमें दो राय नहीं कि प्रदेश और केंद्र सरकार की तरफ से पहले ही महिला कल्याण से संबंधित कई योजनाओं का संचालन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा, सेहत, स्वावलंबन और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए ठोस पहल करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में प्रदेश की महिलाएं पहले ही धुरी हैं। छोटी-छोटी योजनाओं के जरिए सरकार की तरफ से भी मदद मिल रही है।

समितियों के जरिए वनांचलों में महिलाएं अपनी उद्यमिता का परिचय दे रही हैं। यही वजह है कि सरगुजा से लेकर बस्तर तक की महिलाओं द्वारा उत्पादित सामान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार तैयार हो गया है। इनमें कृषि उत्पाद से लेकर कलाकृतियां तक शामिल हैं। प्रदेश सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति संवेदनशील है। यह सभी स्वीकार करते हैं कि स्त्री शक्ति ही सांस्कृतिक मूल्यों और कलाओं की मुख्य संवाहक होती है। परंपरागत रूप से मां अपनी बेटियों में छोटे-छोटे गुण भर देती है।

ये गुण पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवारों में आगे बढ़ते रहते हैं। तकनीकी विकास के इस युग में बेटियां पढ़-लिखकर लोक परंपराओं में तकनीकी समावेश कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय पटल पर छत्तीसगढ़ की विरासत को मान-सम्मान मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के हर जिले में महिला महाविद्यालय और छात्रावास की स्थापना का वादा किया है और उम्मीद की जानी चाहिए कि बहुत जल्द घोषणा को धरातल पर लाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बजट में नौ कन्या छात्रावासों के लिए धन का प्रबंध किया गया है।

इसे और गति दिए जाने की जरूरत है। कन्या छात्रावासों की सुरक्षा के लिए महिला होमगार्डों की नियुक्ति की प्रक्रिया को भी तेज किए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों को नर्सरी प्ले स्कूल के रूप में विकसित किए जाने की बात कही है। इसके लिए प्रशासनिक तौर पर जोरदार प्रयास की जरूरत होगी। अभी आंगनबाड़ी केंद्रों के बारे में कम ही लोगों की राय अच्छी है। जब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति सतर्क नहीं किया जाएगा, तब तक मुख्यमंत्री का विचार साकार रूप नहीं ले सकेगा।

सरकारी योजनाओं को सफल बनाने में अधिकारियों की अहम भूमिका होती है। निजी संस्थाओं में कम वेतन के बाद भी कर्मचारी जिस जिम्मेदारी के साथ काम करते हैं, वह सरकारी संस्थाओं में नहीं हो पाता तो उसके पीछे अधिकारियों की औपचारिकता पूरी करने वाली भावनाओं का भी बड़ा योगदान होता है। नेतृत्व का दायित्व ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रति कठोरता दिखाने का है, जो योजना की सफलता में बाधक है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मुख्यमंत्री की भावनाओं के अनुरूप महिला सशक्तीकरण के प्रयासों को नई दिशा देते हुए लक्ष्य प्राप्ति में सफलता हासिल की जाएगी।

Posted By: Azmat Ali

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