वाकेश कुमार साहू। रायपुर(नईदुनिया)

लॉकडाउन ने सब्जी उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। मुनाफा तो दूर, मजदूरों का खर्च तक नहीं निकल पा रहा है। रही सही कसर आंधी-तूफान और बारिश ने निकाल दी। सब्जी की फसल तबाह हो गई। परेशान किसान अब आने वाले दिनों में सब्जी के बजाय धान और अन्य फसल लेने की सोच रहे हैं। किसानों का कहना है कि सब्जियों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। बाहर सप्लाई नहीं हो रही है। स्थानीय व्यापारी औने-पौने दाम में खरीद रहे हैं। नतीजतन बीज, कीटनाशक, गाड़ी किराया, मजदूरी आदि के लिए पैसे निकलना मुश्किल हो गया है। यह स्थिति उनके लिए दोहरी मार है, जो किसान जमीन रेगहा लेकर (लीज) सब्जी की खेती कर रहे हैं। जब मजदूरी भुगतान के लिए ही पैसे नहीं निकल पा रहे हैं तो जमीन मालिक को कहां से पैसे देंगे। उल्लेखनीय है कि राजधानी के आसपास भाठागांव, दतरेंगा, मुण्डरा समेत कई गांवों के किसान बारहों महीने सब्जी की खेती करते हैं। बेमौसम बारिश से सब्जी की फसल नष्ट हुई तो पटवारी सर्वे कर रहा है। अभी तक एक रुपये का मुआवजा नहीं मिल पाया है।

20-30 रुपये कैरेट में खरीद रहे बरबट्टी

मंडी में एक कैरेट बरबट्टी 20 से 30 रुपये में खरीदी जा रही है। एक कैरेट में लगभग 13 किलो बरबट्टी होती है। इसके बावजूद सब्जी मंडी में पूरी सब्जी नहीं बिक पा रही है। अभी पांच एकड़ में बरबट्टी की खेती कर रहा हूं। उचित दाम नहीं मिलने से स्थिति यह है कि कीटनाशक, दवाई, मजदूर और गाड़ी किराया तक के लिए पैसे नहीं निकल पा रहे हैं। अब आने वाले दिनों में सब्जी की खेती एक-दो एकड़ में करेंगे। अभी फसल को हुए नुकसान को सर्वे पटवारी कर रहा है, मुआवजा नहीं मिला है।

-शंकर लाल सोनकर, सब्जी उत्पादक किसान भाठागांव

मंडी में भी नहीं बिकी, सड़क पर फेंकनी पड़ी सब्जी

दो एकड़ खेत लीज में लेकर सब्जी की खेती करते हैं। मुसीबत यह है कि एक तो उचित दाम नहीं मिल रहा है, ऊपर से मंडी में पूरी सब्जी भी नहीं बिक पा रही है। इसके कारण सब्जियों को सड़क पर फेंकना पड़ा। अभ आंधी-तूफान और बारिश से फसल नष्ट हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान टमाटर, बैंगन, भाजी की फसलों को हुआ है। बारिश के कारण भाजी गलने लगी है। कीट-प्रकोप का खतरा बढ़ गया। परेशानी यह है कि जब मजदूरी भुगतान के लिए पैसे नहीं निकल पा रहे हैं तो जमीन मालिक को कहां से देंगे। अब लीज पर जमीन लेकर खेती नहीं करने की सोच रहे हैं।

-मदन लाल यादव, किसान दंतरेगा

फूल की खेती चौपट

लीज पर जमीन लेकर चार एकड़ में सब्जी की खेती कर रहे हैं। साथ में फूल की खेती भी कर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण मंदिर, देवालय बंद हैं, जिससे फूल की मांग नहीं है। इस कारण अन्य फसल लेने के लिए मजबूरन हल चलाना पड़ा। बैंगन, बरबट्टी, टमाटर आदि की फसलें ले रहा हूं। लॉकडाउन में शादी, समेत अन्य आयोजन न के बराबर होने से सब्जियां बाड़ी में ही सड़ रही हैं। आए दिन मौसम खराब होने से बीमारी फैल रही है।

-दया राम निषाद, किसान मुण्डरा

Posted By: Nai Dunia News Network

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