रायपुर। एक वह दौर था, जब नेता कोई वादा करने से पहले बार-बार सोचते थे, क्योंकि यह उनके व्यक्तिगत मान-सम्मान से जुड़ा होता था। तब प्रचार-प्रसार बहुत शालीन था। नेता मर्यादित भाषण करते थे। यही कारण था कि एक बार लोकसभा चुनाव के दौरान एक नेता पर लाठीचार्ज हुआ तो यह घटना सालों तक चर्चित रही।

यह कहना है कि 81वर्षीय रायपुर के वरिष्ठ व्यापारी कस्तूरचंद बुरड़ का। कस्तूरचंद बुरड़ याद करते हुए बताते हैं कि एक बार चुनाव के दौरान प्रत्याशी शारदाचंद्र तिवारी और गुलाटी लाल पुजारी एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में थे। शारदाचंद तिवारी चुनाव के दौरान वर्तमान गांधी चौक पर भाषण दे रहे थे, तभी यहां किसी कारण से लाठीचार्ज हो गया। शारदाचंद तिवारी ने दूसरे दिन पट्टी बांधकर खुली जीप में निकलकर कर प्रचार किया। लोग इसे आज भी याद करते हैं।

इंदिरा के जमाने में मर्यादा ज्यादा थी

कस्तूरचंद बुरड़ ने बताया कि जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी चुनाव लड़ती थीं तब तो माहौल बहुत ही शालीन और मर्यादित था। लोग आलोचना भी खुले तौर पर करते थे। 1977 के चुनाव में जब इंदिरा के खिलाफ लोगों के खिलाफ आक्रोश था भारतीय लोकदल पार्टी के सांसद रायपुर में बने, लेकिन उस समय भी प्रचार काफी शालीन होता था। छोटे जुलूस निकलते थे, प्रत्याशी पर्चा बांटते थे।

घर-घर जाते थे। कोई अभद्र बात नहीं होती थी। आज सोशल मीडिया के आने के बाद राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है। पहले के नेता ज्यादा विश्वसनीय रहे हैं। बात की कीमत होती थी। पहले जो मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ते थे, उसके लिए ही जीतने के बाद भी लड़ते थे। नईदुनिया कस्तूरचंद बुरड़ के लंबी उम्र की कामना करता है।