रायपुर। लोकसभा चुनाव का बिगुल अभी बजा तो जरूर है पर असली युद्ध शुरू इस महीने के आखिरी से ही शुरू होगा। बस्तर लोकसभा सीट पर पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होना है। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट में चुनाव प्रचार भी खास अंदाज में होता है।

बस्तर लोकसभा सीट का अधिकांश इलाका नक्सल प्रभावित है। नक्सली भारतीय गणराज्य से लड़ने का दावा करते हैं इसलिए लोकसभा चुनाव में अड़ंगा लगाने की भरपूर कोशिश करते हैं। इसके बावजूद गांवों में अभी से बकरा-भात की पार्टियों की तैयारी शुरू हो गई है। राजनीतिक दल फिलहाल बैठकों में व्यस्त हैं।

उम्मीदवारों के नामों के स्क्रूटनी की जा रही है। पर इसी बीच बस्तर के साप्ताहिक हाट-बाजार में उम्मीदवार जुटने लगे हैं। बकरा भात पार्टियों के लिए ग्रामीणों का समर्थन जुटाया जा रहा है। टिकट मिली तो कहां पार्टी होगी, कौन-कौन शामिल होगा यह सब तय किया जा रहा है। होली के मौके पर बस्तर के दंतेवाड़ा और माड़पाल समेत कई बड़े गांवों में मेले मंडई का आयोजन होना है।

यहीं से चुनाव प्रचार जोर पकड़ेगा। बकरा भात की पार्टी आदिवासी परंपरा का हिस्सा है। आदिवासियों में शादी-ब्याह से लेकर मृत्युभोज तक बकरा भात का सामूहिक आयोजन किया जाता है। चुनावों में नेता इस परंपरा का उपयोग वोटरों को रिश्वत देने में करते हैं।

इसके लिए ग्राम प्रमुख, पुजारी, गायता, पटेल आदि जो ग्राम व्यवस्था के प्रमुख होते हैं उनसे संपर्क किया जाता है। गांव की देवगुड़ी में पूजा का आयोजन किया जाता है जिसमें बकरे की बलि दी जाती है। फिर सारा गांव मिलकर बकरा भात का मजा लेता है। इस पार्टी में महुए की शराब तो रहती ही है। मंदिर का प्रसाद और उल्लास वोटरों को शपथ दिलाने का बेहतर अवसर होता है।

माटी किरिया का है बड़ा महत्व

आदिवासी परंपरा में माटी किरिया यानी मिट्टी की सौगंध का बड़ा महत्व है। बकरा भात जैसे आयोजनों के बाद प्रत्याशी ग्रामीणों को सामूहिक रुप से माटी किरिया देकर अपने पक्ष में वोट देने का वचन लेते हैं। अगर यह हो पाया तो वोट पक्का है। हालांकि आधुनिक युग में ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का प्रसार हुआ है और माटी किरिया देकर वोट हथिया लेना कोई इतना आसान काम भी नहीं रहा है।

बढ़ेगा बकरा का दाम

बस्तर के ग्रामीण इलाके के एक आदिवासी नेता ने माना कि बकरा भात का आयोजन करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि मुझे एक गांव की जिम्मेदारी दी गई है। दिक्कत यह है कि अभी टिकट नहीं बंटा है और बाद में जब चुनाव नजदीक आ जाएंगे तो बकरा नहीं मिलेगा, मिला भी तो बहुत महंगा मिलेगा।

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