रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नवरात्र के अंतिम दिन नवमीं तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की गई। प्राचीन परंपरा अनुसार अष्टमी की रात्रि जोत विसर्जन के पश्चात मां महामाया का शस्त्रों से श्रृंगार किया गया। इसे '"वीर मुद्रा"" श्रृंगार कहा जाता है। माता के आठों हाथों में शस्त्र धारण कराया गया। वर्ष में केवल दो बार नवरात्र की अष्टमी तिथि पर जोत विसर्जन के पश्चात वीर मुद्रा में श्रृंगार करने की परंपरा है। इस अद्भुत श्रृंगार का दर्शन करने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े।

माता को 56 भोग और कन्या पूजन

मातारानी को 56 भोग अर्पित करके कन्या पूजन किया गया। कन्या भोज के पश्चात महाभंडारे में प्रसादी वितरित की गई। पुरानी बस्ती के महामाया देवी, शीतला माता, सत्ती बाजार स्थित अंबा देवी, आकाशवाणी तिराहा स्थित काली मंदिर सहित अनेक देवी मंदिरों में कन्या पूजन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। मंदिरों के अतिरिक्त अनेक मोहल्लों, चौक-चौराहों और दुर्गा पंडालों में दोपहर से शाम तक भंडारे का आयोजन किया गया।

300 से अधिक स्थानों पर भंडारे में भोजन सेवा दी गई। फूल चौक, लाखेनगर, बूढ़ेश्वर मंदिर, काली बाड़ी तिराहा, बैरनबाजार, समता कालोनी, लोहार चौक, देवेन्द्र नगर, फाफाडीह, गुढ़ियारी, सुंदर नगर, डीडी नगर, रायपुरा, स्टेशन रोड, बढ़ईपारा, रामसागरपारा, सत्ती बाजार, कटोरातालाब, देवपुरी, तात्यापारा, नहर पारा, टिकरापारा, डीडी नगर, आमापारा, कंकालीपारा, डंगनिया सहित अनेक इलाकों में कई स्थानों पर भंडारे में भीड़ उमड़ी।

देवी प्रतिमाओं का विसर्जन

भंडारे के बाद अनेक पंडालों से दुर्गा माता की प्रतिमाओं को महादेवघाट स्थित अस्थाई विसर्जन कुंड में विसर्जित किया गया। पहले दिन कम प्रतिमाएं विसर्जित की गई। ज्यादातर प्रतिमाएं दशमीं तिथि पर बुधवार को विसर्जित की जाएगी।

Posted By: Pramod Sahu

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