रायपुर। देश भर में बढ़ रहे महिला अपराध पर महिलाओं की सतर्कता और महिलाओं द्वारा सबसे पहले आवाज उठाना बेहद जरूरी हो गया है। चाहे वह घर हो या कार्यस्थल या कोई भी जगह, महिलाओं के अपनी आवाज बनना बहुत आवश्यक है। इसी कड़ी में राजधानी के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर में 25 नवंबर से 10 दिसम्बर तक महिला पखवाड़ा 2022 का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान 25 नवंबर, अंतराष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस पर एक आनलाइन टाक का आयोजन किया गया। इस आनलाइन टाक का विषय "कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न का सामाजिक मनोविज्ञान" रहा। जिसकी मुख्य वक्ता डा. वर्षा वरवंदकर रही। बता दें कि डा. वर्षा वरवंदकर एक मनोवैज्ञानिक और एक प्रसिद्ध करियर काउंसलर भी हैं। डा. वरवंदकर द्वारा पिछले दो दशकों में 1.85 लाख से अधिक व्यक्तियों की काउंसलिंग की गई है।

इस कार्यक्रम क आयोजन आनलाइन मोड में किया गया तथा महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विषयों जैसे, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण एवं उससे जुड़े प्रासंगिक मामलों के लिए दहेज निषेध अधिनियम 1961, महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 पर विस्तार से चर्चा की गई तथा महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम की संचालक गणित विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. दीपमाला शर्मा रही।

मुख्य वक्ता ने इसके लिए कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए कि जिस कार्यालय में 10 से अधिक महिला कार्यरत हैं वहां महिला अधिकार समिति होना चाहिए। तथा किसी महिला के साथ अनैतिक व्यवहार होने पर तत्काल उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत करने की बात कही। उन्होंने बताया कि जो महिला तलाकशुदा, विधवा तथा जिनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होती है वे ज्यादातर उत्पीड़न की शिकार होती हैं तथा उन्होंने इसके निवारण के उपाय भी बताएं। इस कार्यक्रम में भौतिकी विभाग की विभागाध्यक्ष, डा. साधना अग्रवाल, मानविकी एवम सामाजिक विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर, डा. मोक्षा सिंह उपस्थित रही।

Posted By: Abhishek Rai

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