रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रुकावटें आती हैं सफलता की राहों में, ये कौन नहीं जानता, फिर भी वह मंजिल पा ही लेता है, जो हार नहीं मानता। इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रहे हैं राजनांदगांव जिले के बुनकर चेतन देवांगन। उन्होंने बताया- कपड़े बुनने का कार्य विरासत में मिला। दादा के जमाने से घर में कपड़े बुने जा रहे हैं, लेकिन इस काम आगे बढ़ाने में कई बाधाएं आईं पर हार नहीं मानी। इसी का नतीजा है कि आज 30 से अधिक तरह के कपड़े बुन रहे हैं

58 वर्षीय चेतन देवांगन आदर्श बुनकर सहकारी समिति मर्यादित सोमझिटिया के मैनेजर के रूप 1991 से कार्यरत हैं। समिति में करीब 200 बुनकर हैं। उन्होंने बताया कि मशीनों का युग आ जाने के कारण कई बुनकरों के पास काम नहीं होता। बुनकरों को ऑर्डर का इंतजार रहता है। इन सबको देखते हुए शासन को बुनकरों के कपड़े खरीदने की व्यवस्था करनी चाहिए, बुनकर के प्रति ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

-- कपड़े बुनने का देते हैं प्रशिक्षण

चेतन देवांगन बताते हैं- जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन विरासत में मिले इस व्यवसाय को आगे बढ़ने के लिए प्रयत्नशील रहा, कभी हार नहीं मानी। पत्नी के साथ कई तरह के कपड़े बुन रहे हैं। मेडिकल चादर, साड़ी, दरी, कंबल, पर्दा की मांग इस समय अधिक है। छत्तीसगढ़ के बुनकरों के कपड़ों की मांग उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में होती है। वे कई युवाओं को कपड़े बनाने का प्रशिक्षण भी देते हैं।

-- बचपन से चला रहे लकड़ी का लून

चेतन ने बताया कि बाजार में अभी कई तरह लून (हथकरघा) आ गए हैं, फिर भी वे अपने हाथों से लकड़ी से बनाए लून का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को लून खरीदने के लिए मदद करनी चाहिए ताकि बुनकरों की आर्थिक स्थिति सुधरे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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