रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

मनुष्य के जीवन में पर्यावरण का अहम योगदान होता है। पर्यावरण स्वच्छ है तो हम और आप भी स्वस्थ हैं। पर्यावरण को कैसे बचाया जाए, किस प्रकार से प्रदूषण से मुक्त किया जाए, इस पर एनआइटी के विद्यार्थियों ने शोध किया है। इनमें मनीष सखलेचा (सिविल ब्रांच) और योगिता उइके (मेकेनिकल इंजीनियरिंग) शामिल हैं। एनआइटी रायपुर के 10वें दीक्षांत समारोह में इन्हें पीएचडी की उपाधि प्रदान की जाएगी।

बता दें कि एक दिसंबर 2019 को आयोजित दीक्षांत समारोह में सत्र 2018-19 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों और शोधार्थियों को डिग्री, उपाधि प्रदान की जाएगी। दीक्षांत का ड्रेस कोड पारंपरिक परिधान कुर्ता-पायजामा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आबिद अली नीमचवाला, सीईओ एंड मैनेजिंग डारेक्टर विप्रो होंगे। इस बार ग्रेजुशन और पीजी के साथ पीएचडी के अलग-अलग विषयों के 1,116 छात्रों को डिग्री और पदक दिए जाएंगे। कुल 51 मेडल दिए जाएंगे, जिनमें 26 गोल्ड मेडल और 25 सिल्वर मेडल होंगे। 43 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी जाएगी। दीक्षांत का रिहर्सल शनिवार को होगा।

मुलतानी मिट्टी और पेड़ों की गोंद से बनाया ड्रीलिंग को असान करने वाला पदार्थ

योगिता ने वर्यावरण को बचाने के लिए रिसर्च कर एक नया पदार्थ ईजाद करने का प्रयास किया, जो जमीन की ड्रीलिंग में सहायक सिद्ध होगा। योगिता ने डॉ. शोभा लता और डॉ. सतीश देवांगन के मार्गदर्शन में 'जल आधारित ड्रीलिंग तरल पदार्थ के रियोलॉजी पर प्राकृतिक गोंद का प्रभाव' पर शोध किया। योगिता ने बताया कि ड्रीलिंग के लिए जो केमिकल का प्रयोग किया जाता है, उससे जमीन प्रदूषित होती है। इसे देखते हुए उन्होंने मुलतानी मिट्टी को बेस बनाकर विभिन्न पेड़ों बबूल, मुनगा, दावड़ा सेमल आदि की गोंद का प्रयोग किया। इनमें दावड़ा और मुनगा की गोंद काफी कारगर है।

भवन निर्माण में सीमेंट, रॉड करते हैं पर्यावरण को दूषित, इनका विकल्प जरूरी

किसी भी भवन को बनाने और उसे नष्ट करने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। भवन निर्माण में इस्तेमाल सीमेंट-रॉड आदि मिट्टी और पेड़ों को दूषित करते हैं। इसे देखते हुए मनीष सखलेचा ने डॉ. समीर बाजपेयी के निर्देशन में 'इवैज्यूएशन ऑफ ग्रीननेस एंड सस्टेनेबिलिटी ऑफ ए बिल्डिंग यूसिंग लाइफ साइकिल असेसमेंट बेस्ट मॉडल' पर रिसर्च किया। उन्होंने लाइफ साइकल चक्र में संसनेलेटी स्कोर के माध्यम से बताया कि किस प्रकार बिल्डिंग मटेरियल पर्यावरण को दूषित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर पर्यावरण का बचाना है तो इसका वैकल्पिक साधन ढूंढ़ना होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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