रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

बढ़ती महंगाई को देखते हुए एक ओर जहां निर्धन परिवारों में सामूहिक विवाह का चलन बढ़ने लगा है वहीं कुछ समाजों में धनाढ्य लोग भी फिजूलखर्ची और दिखावे की प्रवृत्ति को खत्म करने के लिए सामूहिक विवाह करने जागरूक हो रहे हैं। एक समाज तो ऐसा भी है जिसने सर्वसम्मति से फैसला कर लिया है कि युवक-युवतियों का विवाह सामूहिक आयोजन में ही किया जाएगा। कोई भी परिवार व्यक्तिगत रूप से भव्य विवाह अथवा पार्टी नहीं करेगा। यही कारण है कि हर साल सामूहिक विवाह के आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं। इसके अलावा 25 से ज्यादा ऐसे समाज हैं जो साल में दो बार परिचय सम्मेलन करवा रहे हैं ताकि माता-पिता को अपनी संतानों का रिश्ता जुड़वाने के लिए शहर-दर-शहर न भटकना पड़े। एक ही छत के नीचे सैकड़ों युवक-युवतियों में से योग्य रिश्तों की तलाश करना आसान हो रहा है।

हिन्दू-मुस्लिम, बौद्ध, सिख-ईसाई, सभी में जागरूकता आई

विवाह योग्य संतानों के लिए वर-वधु तलाशने अभिभावक दूर शहरों में जाते थे। एक साल में कई बार जाना पड़ता था। इससे समय की बर्बादी, हजारों रुपए का खर्च और मानसिक तनाव झेलना पड़ता था। अब इन सारी झंझटों से मुक्ति मिल रही है। परिचय सम्मेलनों के प्रति हिन्दू, मुस्लिम, बौद्ध, सिख-पंजाबी, सिंधी, ईसाई सभी धर्मों के लोगों में जागरूकता आई है।

हरदिहा साहू समाज में सिर्फ सामूहिक विवाह

हरदिहा साहू समाज के अध्यक्ष नंदकुमार साहू बताते हैं कि समाज में कई ऐसे परिवार हैं, जो बड़ी मुश्किल से गुजारा कर पाते हैं। वे शादी-ब्याह में लाखों रुपए खर्च नहीं कर सकते। इसे देखते हुए तीन साल पहले समाज की बैठक में निर्णय लिया गया कि सामूहिक आयोजन में ही युवक-युवतियों का विवाह किया जाएगा। तीन सालों में दो हजार से अधिक युवक-युवतियों का विवाह कराया जा चुका है।

युवतियां खुलकर बताने लगी हैं अपनी पसंद

छत्तीसगढ़ पंजाबी सनातन सभा के प्रवक्ता सतीश भूटानी बताते हैं कि अब वह समय नहीं रहा जब युवक-युवती एक-दूसरे को देखने और अपनी पसंद बताने पर हिचकते थे। अब तो युवतियां भी खुलकर अपनी पसंद बताने लगी हैं। परिचय सम्मेलनों में देश के कई राज्यों से अभिभावक अपने विवाह योग्य बच्चों के साथ पहुंच रहे हैं। इससे रिश्ता जुड़वाने में झंझट खत्म हो रही है। पिछले पांच साल में तीन हजार से अधिक युवा परिचय सम्मेलन में आ चुके हैं। एक हजार से अधिक रिश्ते जुड़ चुके हैं।

सतनामी समाज में हर साल 25 जोड़ों का हो रहा विवाह

सतनामी समाज के प्रवक्ता चेतन चंदेल बताते हैं कि साल में दो बार होने वाले परिचय सम्मेलन में दो हजार से अधिक युवा पहुंचते हैं। साथ ही हर साल 25 से अधिक जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हो रहा है। इसमें दूल्हा-दुल्हन के लिए समाज द्वारा वैवाहिक परिधान की सुविधा और गृहस्थी की सामग्री उपहार में दी जाती है। मात्र तीन जोड़ों के विवाह से शुरू हुआ सिलसिला अब 25 जोड़ों तक पहुंच चुका है।

सिंधी समाज में 30 जोड़े

सिंधी समाज की अलग-अलग संस्थाओं द्वारा होने वाले सामूहिक आयोजन में 30 से अधिक जोड़े परिणय सूत्र में बंध रहे हैं। गोदड़ी वाला धाम के सेवादारी अमर गिदवानी, सिंधु एकता संघ के सुभाष बजाज बताते हैं कि हर सामूहिक विवाह में संख्या बढ़ रही है। परिचय सम्मेलनों में भी 300 युवक-युवतियां शामिल हो रहे हैं।

दिव्यांग-विधवा विवाह संख्या बढ़ रही

राजधानी में तीन संस्था ऐसी है जो दिव्यांग और विधवाओं का विवाह कराने में अहम योगदान दे रही हैं। इनमें नेचर केयर्स सोसाइटी की डॉ.विनीता पांडेय बताती हैं कि हर साल सम्मेलन में 400 विधवा, विधुर, परित्यक्ता परिचय देते हैं। इनमें 10 से अधिक का सामूहिक विवाह कराया जाता है। अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के सत्येन्द्र अग्रवाल बताते हैं कि हर साल प्रदेशभर से 100 से अधिक दिव्यांग परिचय देते हैं और 20 दिव्यांगों का विवाह संपन्न हो रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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