रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का मौदहापारा इलाका प्रदेश भर में कबाड़ का सबसे बड़ा मार्केट माना जाता है। आपको मकान बनाने के लिए लोहे का कुछ भी सामान चाहिए अथवा पुरानी से पुरानी गाड़ियों के कल-पुर्जे चाहिए तो सब कुछ आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। इस मार्केट में पिछले तीन साल से हर रविवार को फुटपाथ पर बाजार सजने लगा है। हालांकि बाजार में कबाड़ का सामान नहीं, बल्कि कपड़े, जूते, खिलौने, घर के सजावटी आइटम, किचन आइटम से लेकर तमाम जरूरी चीजें कम कीमत पर बिकती हैं। बाजार की खासियत यह है कि आधी रात के बाद से ही व्यापारी फुटपाथ पर अपनी दुकानें सजाना शुरू कर देते हैं, सुबह पांच बजे से लोग खरीदारी करने पहुंच जाते हैं। देखते ही देखते भीड़ उमड़ने लगती है, बाजार गुलजार हो जाता है। मात्र पांच घंटे में ही कारोबारी अच्छा खासा धंधा करके दुकान समेटना शुरू कर देते हैं और 11 बजते-बजते कारोबारी अपने घर पहुंच जाते हैं।

राजधानी के दूसरे इलाकों के बाजार में आपको दुकानों के नाम पढ़ने को मिलेंगे, लेकिन मौदहापारा इलाके में किसी दुकान का कोई नाम नहीं है। लगभग एक किलोमीटर के दायरे में फैला बाजार मौदहापारा इलाके में होने की वजह से इसे मौदहापारा बाजार का नाम दे दिया गया है।

किसी कारोबारी की जगह फिक्स नहीं

इस बाजार में किसी कारोबारी की दुकान का कोई निश्चित ठिकाना नहीं है। आधी रात बाद सबसे पहले जो भी कारोबारी बाजार में आ जाए वह जगह चुनकर दुकान खोल लेता है। इसके लिए उसे न तो नगर निगम को टैक्स देने की जरूरत है और न ही पुलिस कर्मियों को कुछ देने की। सभी व्यापारी आपसी समझदारी से ही दुकान लगा लेते हैं।

ग्राहक-व्यापारी का एक-दूसरे पर विश्वास

इस बाजार में आप कोई भी चीज खरीदिए, लेकिन बिल नहीं मिलेगा। दुकानदार यह आश्वासन जरूर देगा कि माल खराब निकले तो अगले हफ्ते वापस कर देना। माल खराब निकलने पर वह दूसरे हफ्ते वापस भी कर दिया जाता है।

युवाओं को मिला रोजगार

जो युवा बेरोजगार थे और पैसों के अभाव में दूसरे मार्केट पर दुकान किराए पर नहीं ले सकते थे, उन युवाओं के लिए फुटपाथ पर लगने वाला यह बाजार वरदान साबित हो रहा है। कई युवा तो ऐसे हैं जो सप्ताह में मात्र एक दिन कारोबार करके अच्छा-खासा कमाने लगे हैं। एक तरह से यह मार्केट बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार देने वाला

Posted By: Nai Dunia News Network

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