00- ऐतिहासिक तालाब में पानी नहीं, आसपास का भूजल स्तर गिरा

रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

रायपुर में तालाबों की अपनी धार्मिक मान्यताएं हैं। हर तालाब का अपना इतिहास है और लोग इन्हें पूजते हैं। कई धार्मिक आयोजन तालाबों के घाट पर होते हैं, लेकिन आज तालाबों का बुरा हाल है। इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं। मोटा-मोटा बजट बनता है, लेकिन काम आधा-अधूरा रहता है। इसका एक उदाहरण है आमापारा स्थित शीतला तालाब। शीतला मंदिर के पीछे है शीतला तालाब। पिछले साल लाखों रुपये के बजट से इसे संवारने का काम शुरू हुआ। काम तब शुरू हुआ जब बरसात आने वाली थी। हुआ भी वही, आधा काम हुआ था कि बारिश शुरू हो गई और काम बंद करना पड़ा। इसके बाद से पूरा साल गुजर गया, शासन-प्रशासन ने मुड़कर कभी इस तालाब की तरफ नहीं देखा। आज स्थिति यह है कि तालाब में पानी नहीं है, यह सूख चुका है। हर तरफ झाड़ियां उग आई हैं। तालाब की इस दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोग फिर से नया बजट लाने की तैयारी में हैं।

एक तालाब नहीं, लगभग हर दूसरे तालाब की यही स्थिति है। जबकि यह प्राइम लोकेशन में है। अफसर सिर्फ दो-तीन तालाब तक ही सीमित हैं, जबकि हर तालाब को संवारा जा सकता है। इस साल तो गहरीकरण संभव नहीं है, यानी लगातार दूसरे साल तालाब सूखा रहेगा।

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तालाब के बीचोबीच था टापू बनाने का प्लान- निगम अफसरों ने इस तालाब के बीचोबीच टापू बनाने की योजना बनाई थी। इसलिए सारी मिट्टी को बीच में रखा जमा करवाया जा रहा था, लेकिन यह प्लान फेल हो गया।

पूजन तक के लिए पानी नहीं-

स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी समय शीतला तालाब के जल का इस्तेमाल मंदिर में पूजन-अर्चन के लिए किया जाता था, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है। लोग तो यह तक कहते हैं वे इस पानी को पीते थे। आज तो पानी नहीं है, जो है वह इतना गंदा है कि चर्म रोग हो सकता है।

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