रायपुर। साइबर ठगी से बचने के लिए जैसे-जैसे आम लोग जागरूक हो रहे हैं, वैसे-वैसे ठग भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पहले फोन कर ओटीपी मांग लेते थे, लेकिन लोगों ने ओटीपी शेयर करना बंद कर दिया तो ठग स्क्रीन शेयरिंग साफ्टवेयर का उपयोग करने लगे हैं। आइटी में सेवा देने वाले लोग सिस्टम में आई खराबी को दूर करने के लिए जिन साफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं, अब उन्हीं इसके माध्यम से ठग हजारों किलोमीटर दूर बैठकर बैंक खाते मिनटों में खाली कर दे रहे हैं।

साइबर सलाहकार मोहित साहू ने बताया कि ठगी के लिए ज्यादातर ठग स्क्रीन शेयरिंग साफ्टवेयर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके माध्यम से दूर बैठा कोई भी व्यक्ति आपके मोबाइल या लैपटाप को अपने इशारे पर चला सकता है। आनलाइन ठगी करने वाले क्विक सपोर्ट, टीम व्यूवर अथवा एनीडेस्क साफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। ये तीनों साफ्टवेयर स्क्रीन शेयरिंग की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। वहीं, आइटी सेवा देने वाले लोग इसका इस्तेमाल सिस्टम में आई खराबी को दूर करने के लिए करते हैं। मोहित बताते हैं किए कोई भी अंजान व्यक्ति कोई नया मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने को कहे तो उनकी बात को न मानें और तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।

ठकी के दो प्रमुख तरीके

1. साइबर फिशिंग

- साइबर अपराधियों के ठगी के सबसे पसंदीदा तरीकों में से एक है साइबर फिशिंग। यानी मछली की तरह लालच में फंसा कर ठगना। इसके तहत अपराधी बिल्कुल असली की तरह आनलाइन शापिंग वेबसाइट या बैंक की वेबसाइट बनाते हैं और आपको मैसेज भेजते हैं। मैसेज खाते से जुड़े होते हैं। इसमें कुछ जानकारी मांगी जाती है। जैसे ही आप जानकारी देते हैं, आपका अकाउंट खाली हो जाता है। इसलिए अंजान वेबसाइट पर नहीं जाना चाहिए।

2. ईमेल ब्लास्टिंग

ईमेल ब्लास्टिंग का अर्थ होता है एक साथ कई मेल आपके आइडी पर भेजना। इसमें लुभावने आफर होते हैं। जैसे लाटरी, कोई सामान खरीदने में छूट आदि। साइबर सलाहकार मोहित बताते हैं कि जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं, यहां पर उसके फोन में रैट (रिमोट एक्सेस टूल) डाउनलोड हो जाता है, उसके बाद आपके फोन या सिस्टम में कुछ डाउनलोडेड होने का लिखा हुआ नोटिफिकेशन आता है। ऐसे में आप तुरंत अपने फोन को फार्मेट कर दीजिए। बिजली बिल भरने के नाम पर भी कोई लिंक भेजता है तो पहले बिजली विभाग से पता कर लें या तुरंत नजदीकी थाने अथवा साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं।

ठगी के मामले

सरकारी अधिकारी के एक लाख रुपये पार

केस-1 : छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग में कार्यरत वरिष्ठ प्रबंधक श्रवण दास से आनलाइन ठगी हुई। एनीडेस्क एप डाउनलोड करवा कर उन्हें शकायर बनाया गया। उन्होंने राजेंद्र नगर थाने में मामला दर्ज कराया है। छह फरवरी को श्रवण दास को अज्ञात नंबर से फोन आया। उसने कहा कि मोबाइल नंबर जीओ में पोर्ट करवाया गया है, जो वेरीफाई नहीं होने की वजह से बंद हो जाएगा। वेरीफाई करने के लिए एनीडेस्क एप मोबाइल में डाउनलोड करवाया गया। इसके एक दिन बाद खाते से दो बार में एक लाख रुपये कट गए।

एनीडेस्क एप्लीकेशन डाउनलोड करवाकर 66 हजार पार

केस : 2 - अमलीडीह निवासी रिटायर्ड एलआइसी अधिकारी श्रीकांत देशपांडेय को काल कर ठग ने करीब 30 मिनट बात कर एसबीआइ के योनो एप्लीकेशन के बारे में जानकारी ली। फिर उनके मोबाइल पर एनीडेक्स एप्लीकेशन डाउनलोड करवाया और उसमें अपना डिटेल भरने को कहा। इसके बाद दो किस्तों में 66,374 रुपये उनके खाते से उड़ा लिए। राजेंद्र नगर थाना में उन्होंने केस दर्ज कराया है।

दो एप डाउनलोड करवाकर 1.90 लाख उड़ाए

केस : 3- कालीबाड़ी के एक दवा कारोबारी को फोन कर ठग ने कहा कि आपका बीएसएनएल का नंबर बंदकर सिम ब्लाक कर दिया जाएगा। नंबर चालू रखने के लिए नए सिरे से दस्तावेज अपडेट करने हैं। कारोबारी ने पूछा कि क्या करना होगा? तब ठग ने उनके मोबाइल पर दो लिंक भेजे। लिंक को क्लिक करते ही एनीडेस्क और आटोमेटिक एसएमएस सर्विस एप डाउनलोड हो गए। फिर उनके खाते से 1.90 लाख रुपये डेबिट हो गए।

ऐसे करें शिकायत

फोन को कभी किसी अंजान व्यक्ति के हाथ में न दें। कोई अंजान लिंक को क्लिक न करें और न ही किसी आफर के चक्कर में न पड़े। कोई भी व्यक्ति आपको फंसाने की कोशिश करता है या ठगी हो चुकी है तो 1930, 155260 या 8595914375 पर काल कर शिकायत करें। भअमीबिैिसी.र्यप.ैह पर लागिन कर भी शिकायत कर सकते हैं। साइबर सेल, पुलिस स्टेशन में भी इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

स्क्रीन शेयरिंग साफ्टवेयर का उपयोग कर ठग हजारों किलोमीटर दूर बैठकर आसानी से ठगी की वारदात कर रहे हैं। इससे बचने के लिए किसी भी अंजान लिंक, आफर के लालच में न आएं। शिकार होने पर तत्काल शिकायत करें। - गौरव तिवारी, साइबर प्रभारी, रायपुर

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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