रायपुर। 15 दिनों तक भीषण गर्मी के बाद मौसम का मिजाज बदला है और प्रदेश के कई स्थानों में झमाझम बारिश हुई है। धमतरी सहित दूसरे शहरों में ओले भी गिरे हैं, जिससे प्रदेश का मौसम ठंडा हो गया है। प्री मानसूनी बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से भारी राहत दिलाई है। प्री मानसूनी बारिश के साथ ही किसानी हलचल होने लगी है। एक-दो बारिश के बाद खेतों में खुर्रा जोताई शुरू हो जाएगी।

ऊपरी हवा में चक्रवात के असर से राज्य के कई हिस्सों में पिछले 24 घंटों के दौरान बारिश हुई है और बादल छाए हुए हैं, जिसके चलते तापमान 40 डिग्री के निचे आ गया है। रायपुर का पारा एक ही दिन में 10 डिग्री गिरकर 35.2 पर पहुंच गया है। जानकारों के मुताबिक इसे मानसून के आने के पहले का परिवर्तन है। फिलहाल मानसून मध्य श्रीलंका से आगे बढ़ रहा है और 5 जून तक केरल पहुंचने की संभावना है।

सोमवार को राज्य के दर्जनभर से अधिक शहरों में झमाझम बारिश हुई है और लू का असर पूरी तरह समाप्त हो गया है। चक्रवात के असर से रायपुर और बिलासपुर संभाग के अधिकतम तापमान में ज्यादा गिरावट आई और दूसरे संभाग में सामान्य गिरावट रिकॉर्ड की गई। सर्वाधिक तापमान बिलासपुर में 40 डिग्री रिकॉर्ड किया गया।

वर्षा के मुख्य आंकड़े

3 सेमी - दुर्ग, पाटन, नगरी

2 सेमी - गुंडरदेही

1 सेमी- माना, धमतरी, मगरलोड, धमधा, गुरुर, महासमुंद, सीतापुर, कांसाबेल

राज्य में मानसून 17 जून तक

मानसून की रफ्तार अभी धीमी है और पांच दिन विलंब से 5 जून को केरल पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ में मानसून की दस्तक 17 जून के आसपास होने की संभावना है और तब तक यहां का मौसम गरजता-बरसता रहेगा। शाम को आंधी आएगी और तेज हवा के साथ बारिश होगी। इस दौरान उमस लोगों को बेचैन कर देगी। मौसम विभाग के अनुसार मानसून आने के पहले मौसम में बदलाव होता है और यह बदलाव भी मानसून के प्रभाव से हुआ है जो आगामी 15 दिनों तक बना रहेगा।

कैसा रहेगा प्रदेश का मौसम

प्री मानसूनी बरसात के बाद मौसम ठंडा हो गया है। 15 दिनों से चल रही लू पूरी तरह समाप्त हो गया है। फिलहाल एक दो दिनों तक मौसम ठंडा रहेगा, जिसके बाद तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होगी। इस दौरान उमस लोगो को हलाकान करेगा। लेकिन शाम को अंधड़ बारिश भी होती रहेगी। अधिकतम तापमान 40 डिग्री के आसपास रहेगा और मानसून की दस्तक तक ऐसा ही बना रहेगा।

लालपुर केन्द्र के मौसम विज्ञानी एम. गोपाल राव के मुताबिक प्रदेश के ऊपरी हवा में चक्रवात बना हुआ है, जिसके असर से बदली और बारिश हो रही। आगामी चौबीस घंटों के दौरान भी कहीं-कहीं पर हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। इसके बाद चक्रवात यूपी की ओर आगे बढ़ेगा और यहां का तापमान ब़ढ़ सकता है।

ग्रीष्मकालीन जुताई से खेत के खरपतवार, कीड़े व बीमारी से निजात

अच्छे उत्पादन के लिए मानसून से पहले खेती की तैयारी जरूरी है। हल्की बारिश होने से खेतों में नमी है। ऐसे में खेतों में ग्रीष्मकालीन जुताई कर खरपतवार, कीड़े व बीमारी वाले कीटों को एक साथ नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही खेतों की मिट्टी परीक्षण के लिए यह उपयुक्त समय है। कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र व इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सहयोग से किसान अपने खेतों की मिट्टी का जांच करा सकते हैं, इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व की कमी व अधिकता के बारे में जाना जा सकता है। यह कहना है कृषि वैज्ञानिकों का। मानसून पूर्व खेती की तैयारियों को लेकर नईदुनिया ने कृषि विज्ञानियों से चर्चा की। उनके मुताबिक अच्छी फसल के लिए मानसून खेती की तैयारी बहुत जरूरी है।

मानसून पूर्व ऐसे करें तैयारी

- मिट्टी का सैंपल लेकर कृषि विभाग की मदद से इसकी जांच कराएं।

- हल्की बारिश की नमी का उपयोग कर, खेतों की जुताई।

- ट्रैक्टर से जुताई के लिए दो नस वाली कल्टीवेटर का प्रयोग करें।

- जुताई से निकलने वाले मिट्टी के बड़े ढेलों को ट्रैक्टर अटैच डिस्क चलाकर तोड़ें।

- ट्रैक्टर चलित लेजर बैंड लेबलर की सहायता से भूमि को समतल करें।

- जुताई के बाद 10 से 15 दिन छोड़ दें।

- इसके बाद घूरे का खाद या गोबर खाद को खेतों में पहुंचाएं।

- रसायनिक खाद का इस्तेमाल न करें।

ग्रीष्मकालीन जुताई जरूरी

बारिश की वजह से खेतों में अभी हल्की नमी है। इस नमी का उपयोग कर किसानों को अपने खेतों में ग्रीष्मकालीन जुताई करनी चाहिए। जुताई के बाद खेत को 10-15 दिन छोड़ देना चाहिए। इससे जमीन के खरपतवार, कीड़े व फसलों में बीमारी पैदा करने वाले अन्य कीट बाहर आ जाएंगे। और सूर्य प्रकाश के संपर्क में आकर ये नष्ट हो जाएंगे। -डॉ.घनश्याम साहू, पौध विज्ञानी, इंदिरा गांधी कृषि विवि, रायपुर

मिट्टी परीक्षण के लिए सही समय

सभी किसानों को अपनी खेत की मिट्टी की जांच करानी चाहिए। इससे मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की कमी या अधिकता का पता चलता है। इसके आधार पर मिट्टी के लिए जरूरी उर्वरक इस्तेमाल किया जा सकता है। अभी मिट्टी परीक्षण के लिए उपयुक्त समय है। -डॉ.कृष्णकुमार, प्रमुख वैज्ञानिक, मृदा विभाग, आईजीकेवी, रायपुर

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