रायपुर। Raipur News : कोरोना महामारी के चलते सभी प्रमुख बाज़ारों की रौनक कम हो गई थी, इनमें से एक मौदहापारा का फुटपाथ बाजार तो लगभग खत्म हो गया था। अन्य बाजार तो धीरे धीरे खुल गए लेकिन मौदहापारा बाजार को अनुमति नहीं दी गई थी। इसके कारण कई छोटे दुकानदारों के समक्ष पेट भरने के लाले पड़ गए थे। उन दुकानदारों ने सब्जियां बेचकर गुजारा करना शुरू कर दिया था।

अब फिर से मौदहापारा बाजार शुरू होने से रौनक वापस लौटने लगी है। जो दुकानदार सब्जी बेचने लगे थे, वे फिर से जूता, कपड़ा, मनिहारी, शाल, स्वेटर, श्रृंगार सामग्री बेचने लगे हैं। इससे उनके चेहरे भी खिल उठे हैं।

राजधानी का सबसे बड़ा फुटपाथ बाजार

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जयस्तंभ चौक से चंद कदमों की दूरी पर मौदहापारा इलाके में महज चार साल पहले कुछ लोग फुटपाथ पर बैठ कर दुकान चलाते थे। देखते ही देखते चंद महीनों में सैकड़ों दुकानदार बैठने लगे। इसके बाद दुकानदारों ने आपस में मिलकर हर रविवार को साप्ताहिक बाजार लगाना शुरू कर दिया।

कबाड़ी बाजार के नाम से प्रसिद्ध

वैसे तो बाजार में मुख्य रूप से जूता, चप्पल, कपड़ा, क्राकरी, इलेक्ट्रानिक सामान बिकते हैं, लेकिन यह कबाड़ी बाजार के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है।

महीनों से था बाजार खुलने का इंतजार

राजधानी वासियों को कोरोना काल मे फुटपाथ बाजार बंद होने के बाद खुलने का इंतजार था, जो पिछले दिनों दीपावली के पहले खोला गया। त्योहार के बाद महज दूसरे रविवार को ही फिर से पहले जैसी चहल पहल दिखने लगी है।

आधी रात से घेर लेते हैं जगह

शनिवार की रात से ही दुकान लगाने वाले जगह घेर लेते हैं, वे अपना ठेला लगाकर, तंबू गाड़ लेते हैं। सुबह 6 बजे से दुकानें सज जाती है। 11 बजते- बजते व्यापारी दुकान समेटना शुरू कर देते हैं। कुछ ही घंटों में हर दुकानदार अच्छी खासी कमाई कर लेता है।

बिना नाम की दुकान

अन्य बाज़ारों की दुकानें किसी नाम से जानी जाती हैं, लेकिन यहां किसी दुकान के सामने बोर्ड नहीं लगाया जाता। जिसे जहां जगह मिलती है वहां बैठ कर धंधा करने लगते हैं। हर सप्ताह जगह बदलती रहती है।

एक-डेढ़ किलोमीटर के दायरे में बाजार

जयस्तंभ चौक के पास से दुकानें लगनी शुरू होती है और फाफाडीह चौक से पहले तक लगभग एक- डेढ़ किलोमीटर के दायरे में तीन-चार सौ दुकानों में लाखों रुपये का कारोबार कुछ ही घंटों में हो जाता है।

विश्वास पर धंधा

किसी भी चीज का बिल दुकानों में नहीं दिया जाता। सारा धंधा विश्वास पर टिका है। माल खराब निकले तो उसे अगले हफ्ते वापस भी करके दूसरा लिया जा सकता है। ऐसी गारंटी कुछ दुकानदार देते हैं।

बेरोजगारों के लिए वरदान

जो युवा बेरोजगार हैं, यह बाजार उनके लिए वरदान साबित हो रहा है। कुछ रुपयों का सामान खरीदकर युवा फुटपाथ पर बैठकर बेच देते हैं। न लाखों रुपये की दुकान किराए पर लेने का टेंशन और न ही नौकरों के भरोसे दुकान चलाने का झंझट। अकेला युवा भी कुछ घंटों में 500 से 1000 रुपये की कमाई करके रोजगार के तनाव से मुक्ति पाने लगा है।

Posted By: Shashank.bajpai

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