रायपुर। Naidunia Column Of The Record: स्कूल शिक्षा विभाग में ईमानदार और भ्रष्टाचार जैसे दो आचरणों के बीच जंग जारी है। इस जंग में भ्रष्टाचार का पलड़ा अधिक भारी है। पहले भ्रष्टाचार करो फिर फाइल दबाकर राज करो की नीति में यह विभाग पहले पायदान पर है। विभाग के एक संयुक्त संचालक को संविदा नियुक्ति दिलाने के लिए भ्रष्टाचारियों की फौज जुट गई है और ईमानदारों का पलड़ा कमजोर हो गया है।

ईमानदार दल इस बात को लेकर परेशान है कि जिस अफसर पर डीईओ रहते हुए पदोन्नति में गड़बड़ी करने के संगीन आरोप हैं, जिस अफसर की खुद की भी पदोन्नति कठघरे में खड़ी है और इस अफसर को गलत तरीके से पदोन्नति देने के मामले में शिक्षा विभाग के पूर्व अवर सचिव के खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है, इसके बाद भी इस संयुक्त संचालक को कोरोना काल में संविदा नियुक्ति देने के लिए अफसर आखिर क्यों आमादा हैं?

नाम के अनुरूप काम

वैसे तो राज्य ओपन स्कूल का सिलसिला प्रदेश में साल 2009 से शुरू हुआ था, लेकिन पिछले सालों में यह केवल परीक्षा लेने वाली एजेंसी बनकर रह गया था। पहली बार ओपन स्कूल अपने नाम के अनुरूप काम करने जा रहा है। दरअसल अफसरों ने इसे अब वर्चुअल स्कूल का स्वरूप देने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। कोरोना काल में यह स्कूल से वंचित हो रहे बच्चों के लिए बेहतर काम होगा।

चर्चा है कि ओपन स्कूल में वर्चुअल कक्षाएं शुरू होंगी तो काम बढ़ेगा और स्कूलिंग काम में रुचि रखने वाले लोग यहां आसानी से रह पाएंगे। केवल परीक्षा कार्य में रुचि लेने वालों के लिए बाहर का रास्ता भी खुल गया है। ऐसे में माहौल के अनुरूप यहां विद्योचित में काम कर रहे लोगों को भी खुद को अपडेट करते रहना होगा, तभी वे वर्चुअल कक्षा के साथ कदम ताल कर पाएंगे।

स्वास्थ्य में अफसर, शिक्षा में आपरेशन कम

राज्य की स्कूल शिक्षा और तकनीकी शिक्षा की बागडोर संभाल रहे एक बड़े साहब इन दिनों स्वास्थ्य की जिम्मेदारी में भी लिप्त हो गए हैं। सरकार ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें इन अहम पदों की जिम्मेदारी दे दी है। इससे कोरोना काल में लोगों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम बदलाव की उम्मीद दिखाई दे रही है, लेकिन शिक्षा के नए सत्र के शुरू होने से पहले ही इस अफसर के स्वास्थ्य विभाग में चले जाने से शिक्षा विभाग में होने वाले आवश्यक आपरेशन भी रुक गए हैं।

चाहे आरटीई घोटाले में आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की बात हो या फिर अफसरों की पदोन्नाति घोटाले की फाइल आगे बढ़ाने का मामला हो। लगभग सभी अकादमिक और प्रशासनिक कामों में बाधा संभावित है। यूं कहें कि साहब अस्पताल में व्यस्त हो गए हैं, शिक्षा के मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है।

आबकारी अफसरों के बीच क्षेत्र विवाद

शराब की होम डिलीवरी के निर्णय ने अफसरों को आपस में उलझा दिया है। अफसर क्षेत्र के विवाद में फंसे हैं। जिस रसूखदार, नेता या ऊपर तक पहुंच रखने वाले लोगों का इन अफसरों से संपर्क है, वह अपने क्षेत्र में शराब भेजने के लिए सीधे फोन लगाकर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में आबकारी अफसर दूसरे के क्षेत्र में भी हस्तक्षेप करने में मजबूर हो रहे हैं।

इसके चलते आपस में विवाद हो रहा है। कुछ मामलों में तो अफसरों का झूठ भी पकड़ा जा रहा है। भाटागांव क्षेत्र की जिम्मेदारी संभाल रहे अफसर से स्टेशन रोड के एक व्यक्ति ने शराब मांगी तो स्टेशन रोड की जिम्मेदारी संभाल रहे आबकारी अफसर नाराज हो गए। मामला विवाद में बदल गया और दोनों अफसर आपस में ही भिड़ गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शराब की आनलाइन होम डिलीवरी सिरदर्द बन गई है।

Posted By: Azmat Ali

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