रायपुर (राज्य ब्यूरो)। Narayan Chandel News: भारतीय जनता पार्टी ने छत्‍तीसगढ़ प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। सांसद अरुण साव के प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष को भी बदल दिया है। पार्टी ने नारायण चंदेल छत्‍तीसगढ़ विधानसभा के नए नेता प्रतिपक्ष बनाए गए हैं। धरमलाल कौशिक की जगह नारायण चंदेल को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। नारायण चंदेल को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का फैसला भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्‍मति से लिया गया।

भाजपा प्रदेश प्रभारी डी. पुरदेंश्वरी आज सुबह रायपुर पहुंची और पार्टी मुख्यालय में विधायकों की बैठक ली। जिसमें उन्होने विधायकों से रायशुमारी तो ली लेकिन नाम दिल्ली से ही तय था जिसकी घोषणा कर विधायकों की सहमति ले ली गई। धरमलाल कौशिक की जगह अब जांजगीर चांपा के विधायक नारायण चंदेल को छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है।

नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद नारायण चंदेल ने मीडिया से बातचीत में कहा, विधायक दल की बैठक में मुझे सर्वसम्‍मति से नेता प्रतिपक्ष की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। सबको साथ लेकर नए दायित्‍व का निर्वहन करेंगे। उन्‍होंने पार्टी के केंद्रीय शीर्ष नेतृत्व का आभार व्‍यक्‍त करते हुए कहा, छत्‍तीसगढ़ में शान से कमल खिलाने का दायित्‍व सौंपा गया है।

बतादें कि सांसद अरुण साव के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद बुधवार को संगठन की पहली बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में पार्टी के सह-प्रभारी नितिन नबीन, प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी, पूर्व मुख्‍यमंत्री डा रमन सिंह, धरमलाल कौशिक शामिल हुए। पार्टी नेताओं के अनुसार प्रदेश संगठन से जुड़े सभी पदाधिकारी भी शामिल हुए।

पूर्व मुख्‍यमंत्री डा रमन सिंह ने नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर नारायण चंदेल को बधाई दी। उन्‍होने कहा, आज जांजगीर-चांपा से विधायक नारायण चंदेल जी को नेता प्रतिपक्ष चुने जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुझे पूर्ण विश्वास है, वह पूरी तन्मयता व आक्रामकता के साथ सड़क से सदन तक विपक्ष की आवाज़ बनेंगे और पूरी निष्ठा से अपने कर्तव्य का निर्वहन करेंगे।

14 विधायकों में छह से अधिक दावेदार

बिलासपुर की बिल्हा सीट से विधायक धरमलाल कौशिक अभी नेता प्रतिपक्ष हैं। प्रदेश में भाजपा के 14 विधायक हैं, लेकिन नए नेता प्रतिपक्ष को लेकर विधायक दो धड़े में बंट गए हैं। इससे नेता प्रतिपक्ष के पद के छह से अधिक दावेदार हो गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा नारायण चंदेल को लेकर है। एक खेमा पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के पक्ष में है। विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के सिर्फ 14 विधायक हैं। ननकीराम कंवर व पुन्‍नुलाल मोहिले अधिक उम्र के कारण दौड़ से बाहर हो सकते हैं। सौरभ सिंह, डा. कृष्‍णमूर्ति बांधी, डमरूधर पुजारी व विद्यारतन भसीन के साथ जातिगत समीकरण नहीं बैठ पा रहा है। वहीं रजनीश सिंह और रंजना साहू पहली बार के विधायक हैं। डा. रमन पूर्व मुख्यमंत्री होने के कारण नेता प्रतिपक्ष बनना नहीं चाहते हैं। ऐसे में नारायण चंदेल के साथ अब बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर व शिवरतन शर्मा की दावेदारी बनती है।

इस कारण बदलाव की है चर्चा

मौजूदा नेता प्रतिपक्ष कौशिक स्वभाव से शांत हैं, जबकि भाजपा अब सरकार के विरुद्ध सदन से लेकर सड़क तक सरकार पर हमला तेज करना चाह रही है। कौशिक को पूर्व सीएम डा. रमन का करीबी माना जाता है। विष्‍णुदेव साय को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के पीछे भी यही दोनों कारण बताए जा रहे हैं।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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