संजय श्रीवास्तव, रायपुर। Navratri 2020: 14 वर्ष वनवास पर गए भगवान राम की पत्नी को रावण द्वारा हरण करने पर भाई लक्ष्मण के साथ उनकी खोज में दण्डकारण्य जंगल में घूम रहे थे। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से 22 किमी दूर नारागांव के जंगल में पत्नी सीता की खोज में जा रहे थे। उसी समय पास के भोलापठार पर भगवान शंकर पत्नी पार्वती के साथ बैठे थे। माता पार्वती सीताजी का रुप धारण कर रामजी की परीक्षा लेना चाहती थी। पार्वती की इच्छा को जानकार पति भोलेनाथ ने मना किया कि वे पहचान लेंगे। पार्वती जी नहीं मानी और रामजी की परीक्षा लेने के लिए सीता का रुप धारण कर एक पत्थर पर खड़ी रही। रामजी ने देखा तो पहचान लिया कि ये पत्नी सीता नहीं है। आखिर पार्वती जी भगवान राम की परीक्षा लेने में खुद ही हार गई। मान्यता है कि उसी समय यहां भगवान राम ने मंदिर स्थापित किया और इसका नाम सियादेही रखा। इसके पीछे यह मान्यता है पार्वती जी के सीता का रुप धारण करना है।

जंजीर में बांधकर रखा है पत्थर का शेर

जैसे शीतला माता की सवारी गधा है उसी तरह शेर को सियादेही की सवारी माना गया है। यहां मंदिर के पास पत्थर का शेर रखा है। जिसे लोहे की जंजीर से बांधा गया है। पुजारी नानी कोर्राम ने बताया इस जंजीर में आज तक जंग नहीं लगी है। जंजीर लगाने के पीछे यह मान्यता है कि जब क्षेत्र में विपत्ति आती है तो इस जंजीर को खोल दिया जाता है, जिससे विपत्ति समाप्त हो जाती है, लेकिन आज तक ऐसी स्थिति नहीं आई है।

नवरात्र में होती है विशेष पूजा व जुटते हैं श्रद्धालु

चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के दौरान सियादेही मंदिर में विशेष पूजा होती है। इस दौरान जिले के अलावा आसपास के जिले के श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। इसके अलावा जन्माष्टमी पर भी मंदिर में विशेष पूजा होती है। पुजारी नानी कोर्राम ने बताया कि त्रेता युग में मंदिर बना है। यहां नवरात्र के अलावा हर दिन भक्तों का आना जाना रहता है।

पत्थर पर उभरी है सियादेही के पैर के निशान

मंदिर के पास एक पत्थर रखा है, जिसपर सियादेही के पैरों के निशान पड़े हैं। मान्यता है कि माता पार्वती जब सीता का रुप धारण कर भगवान राम की परीक्षा लेने के लिए जिस पत्थर पर खड़ी थीं। उसपर उनके पैरों के निशान उभर गए हैं।

भोलापठार पर माता पार्वती के साथ बैठे थे भोलेनाथ

मंदिर से थोड़ी दूरी पर भोलापठार है। यह जमीन ऊंचाई पर है। पुजारी के कहा मान्यता है कि यहीं से भगवान शंकर विष्णु के अवतार भगवान राम के दर्शन के लिए यहां बैठे थे। मान्यता है कि भोलेनाथ रामजी की पूजा करते हैं और भगवान राम शिवजी की पूजा करते थे।

25 फीट ऊंचा झरना है

घने जंगल के बीच स्थित मंदिर के पास 25 फीट ऊंचाई से गिरता हुआ झरना है। इस झरना का पानी बहते हुए पास के जलाशय मेंं इकट्ठा होता है। यहीं से रायपुर राजधानी में बहने वाली प्रमुख नदी खारुन का उद्गम स्थल है। इस झरना को देखने के लिए पर्यटकों की समय-समय पर भीड़ लगती है। बरसात के महीने में झरना से तेज धार के साथ पानी गिरता है। सियादेही मंदिर परिसर का धार्मिक व पर्यटन के दृष्टिकोण से महत्व है।

Posted By: Himanshu Sharma

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