रायपुर। Navratri 2022 छत्तीसगढ़ को धर्मभूमि के रूप में माना जाता है। रायपुर प्राचीन समय से अपने तालाबों व मंदिरों के लिए ख्याति प्राप्त रहा है। राजा महाराजाओं के बनाए मंदिरों के साथ-साथ जन सामान्य के द्वारा बनवाए मंदिर भी है। ऐसी ही एक प्राचीन और दैवीय शक्ति की अनुभूति कराने वाली मंदिर है मां महाकाली मंदिर।

जहां सिर्फ नवरात्र में भीड़ नहीं रहती, बल्कि सामान्य दिनों में भी माता के दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। जहां अपनी मनोकामना की पूर्ति हेतु हजारों की संख्या में शहर के साथ दूसरे जिले से भी ज्योति कलश जलाते हैं। रास्ते पर आवाजाही करने वाला व्यक्ति भी काली माता का आशीर्वाद पाने शीश झुकाता है।

मंदिर वाले स्थान पर नागा साधु भी रमा चुके हैं धुनी

राजधानी के आकाशवाणी चौक के मुख्य मार्ग पर काली माता के वर्तमान भव्य मंदिर का इतिहास काफी रोचक है, मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर वाले स्थान पर कभी नागा साधु भी धुनी रमा चुके हैं। माता के मंदिर से ऐसी मान्यता जुड़ी हुई है कि जिस जगह नागा साधुओं ने पत्थर के निशान रखे थे, वहीं मां काली का गर्भ गृह बनाया गया है। इसकी मान्यताएं कोलकाता के काली माता से जुड़ी हुई है। नवरात्र के पर्व के दौरान मन्न्तों की हजारों ज्योति जगमग है। पूजा आरती करने हर दिन भक्तों की भीड़ लगती है।

स्वयंभू है मां काली, नीम पेड़ के नीचे से निकली हैं

जानकार बताते हैं कि मां महाकाली स्वयंभू है। माता नीम पेड़ के नीचे से निकली हैं। मां महाकाली का मंदिर लगभग 100 वर्ष पुराना है। मान्यता के अनुसार मां महाकाली कोलकाता की काली माता से जुड़ी हुई हैं। कोलकाता में माता काली का शरीर है। वहीं आत्मा रायपुर में है। इस कारण मंदिर का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।

Posted By: Pramod Sahu

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