शशांक शेखर बाजपेई। हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व को विशेष रूप से मनाया जाता है। कहते हैं इस नवरात्रि पर्व में कई महामारी से मुक्ति प्राप्त होती है। भगवती का नव स्वरूपों में वर्णन हमें पौराणिक ग्रंथों से प्राप्त होता है। सप्तशती के अनुसार, पूरे वर्ष में तीन रात्रियां बताई गई हैं। पहली कालरात्रि, दूसरी मोहरात्रि और तीसरी महारात्री।

कहा भी गया है- कालरात्रि, महारात्रि। मोहारात्री च दारूणा। कालरात्रि अर्थात जिस दिन सूर्य चंद्रमा पृथ्वी से दूरी बना लेते हैं अर्थात दीपावली का दिन। जब सूर्य और चंद्रमा की अग्नि पृथ्वी पर प्राप्त नहीं होती है, उस दिन को कालरात्रि कहा जाता है। नवरात्रियों को मोह रात्रि कहा जाता है और महाशिवरात्रि को महारात्रि कहा जाता है। रात्रि शब्द लगने से भगवती का पूजन रात्रि के समय में ही विख्यात है। अर्थात हमें नवरात्रि में रात्रि में भगवती का पूजन करना चाहिए जिससे भगवती के प्रादुर्भाव, जो नवरात्रि में हुआ है, उस दिन विशेष शक्तियों का प्रभाव पूरे संसार में व्याप्त हो।

महामारी का होता है प्रकोप

इंदौर के पंडित गिरीश व्यास बताते हैं कि इसी समय डेंगू, टाइफाइड, मलेरिया जैसी महामारियों का प्रकोप होता है। इन बीमारियों से रक्षा के लिए, बेहतर स्वास्थ्य के लिए भगवती की आराधना पूजा की जाती है। अर्थात समस्त महामारी का शमन यदि किसी से हो सकता है, तो वह भगवती की आराधना से ही हो सकता है। इसमें उपवास का भी बड़ा महत्व है। बाहरी वस्तु का शरीर में यदि प्रवेश नहीं होगा, तो कोई भी महामारी हमें नहीं सताएगी। इसलिए नौ दिन के उपवास से यह महामारी अंदर प्रवेश नहीं करती, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां नहीं होती हैं और यदि होती भी हैं, तो जल्द लाभ प्राप्त होता है। इसीलिए नौ दिनों तक भगवती की आराधना करनी चाहिए।

खीर और हलवा करता है पित्त का शमन

नवरात्रि में मां के व्रत और पूजन के बाद कन्याओं को खीर और हलवे का भोग लगाने की परंपरा रही है। दरअसल, इसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण है। वर्षा के पश्चात मच्छर उत्पन्न हो जाते हैं, जिनकी वजह से मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियां पनपने लगती है और शरीर में असंतुलित होने लगता है। इससे बचाव के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने खीर और हलवा खाने का विधान रखा। आप देखेंगे श्राद्ध से लेकर शरद पूर्णिमा तक खीर और हलवे का ही भोग लगता है तथा अधिक मात्रा में खीर खाई जाती है। खीर और हलवा शरीर के पित्त को संतुलित करता है, जिससे मच्छर के काटने से होने वाली मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियां नहीं होती हैं।

दक्षिणा ऐसी दें जो काम आए

कोरोना महामारी की वजह से इस बार बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक घरों में कैद हो गए हैं। पंडित गिरीश व्यास बताते हैं कि इस नवरात्रि में कन्या भोज के बाद यदि आप कुछ देना चाहते हैं, तो उन्हें दक्षिणा के रूप में सस्ते इंडोर गेम्स और शिक्षाप्रद पुस्तकें दें, जिससे उनका ज्ञान बढ़ेगा। आप पेंसिल, कापी या पेन भी दे सकते हैं।

Posted By: Arvind Dubey

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