रायपुर (राज्य ब्यूरो)। नक्सलियों के खिलाफ आक्रामक अभियान और विकास कार्यों की वजह से बस्तर में नक्सलवाद की जड़े कमजोर हो रही हैं। लोगों में पुलिस और सरकार के प्रति भरोसा भी बढ़ा है। इस भरोसे को बढ़ाने में पुलिस के जन जुड़ाव वाले अभियानों की बड़ी भूमिका है। पुलिस करीब दर्जनभर अभियान चला रही हैं। इसकी वजह से रास्ता भटक चुके लगभग 550 युवा हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। इसमें दंतेवाड़ा में लोन वर्राटू अभियन से प्रभावित होकर करीब 253 और सुकमा में पूना नर्कोम की वजह से 221 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

बस्तर संभाग में पुलिस बीते तीन वर्षों से विकास, विश्वास और सुरक्षा के मंत्र के साथ काम कर रही है। इसके तहत लोगों के बीच सरकार के प्रति विश्वास बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। सरकार की तरफ से स्थानीय स्तर पर ही युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। बस्तर आइजी सुंदरराज पी. इसी महीने एक प्रेसवार्ता में जानकारी दी थी कि इन कोशिशों का असर यह हुआ है कि संभाग में 2021 में नक्सली हिंसा में करीब एक प्रतिशत की कमी आई है। उनके अनुसार जनसरोकार के अभियानों का भी अच्छा असर हुआ है। इन्हीं अभियानों की वजह से 2021 में सबसे ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसपर्मण किया है।

खेलकूद व सवांद से लेकर पौधारोपण तक

बस्तर में जनता का विश्वास जीतने के लिए पुलिस एक दर्जन अभियान चला रही है। इसमें खेलकूद, संवाद और पौधारोपण सहित अन्य कार्यक्रम शामिल हैं। स्थानीय लोग इन अभियानों से आसानी से जुड़ सकें इसलिए इनके नाम भी बोली-भाषा में ही रखे गए हैं। पौधारोपण के अभियान को पोदला उरस्कन नाम दिया गया है। इसके तहत 11 हजार से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं। महिला और बालिका सुरक्षा के लिए आमचो पुलिस आमचो संगी के नाम से कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसे निया नार निया पुलिस नाम दिया गया है।

सड़क के रास्ते पहुंच रहा विकास

बस्तर के पहुंच वीहिन क्षेत्रों में सड़कों का विस्तार किया जा रहा है। इन सड़कों का निर्माण पुलिस के ही सहयोग से किया जा रहा है। पुलिस भी मानती है कि सड़क के रास्ते ही विकास पहुंचता है। बीते वर्ष संभाग में करीब 680 किलोमीटर सड़क बनाई गई है। इसमें बारसूर-पल्ली की वह सड़क भी शामिल है जिसे 30 वर्ष से बनाने की कोशिश की जा रही थी। बस्तर के ऐसे अंदरुनी इलाकों में भी सड़कों का निर्माण किया गया है, जहां कुछ वर्ष पहले तक सड़क की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

Posted By: Sanjay Srivastava

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