New Education Policy : संदीप तिवारी, रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। शिक्षा की व्यवस्था बदल रही है। स्कूली पढ़ाई में केंद्र सरकार ने जो मानक बनाए हैं उनमें प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी, मातृभाषा में पढ़ाने का फार्मूला छत्तीसगढ़ में पहले से ही चल रहा हैे। केंद्र से सुझाव मांगने पर छत्तीसगढ़ से इन योजनाओं का सुझाव भेजा गया था। इसके अलावा प्रदेश में कई योजनाएं चल रही हैं, जो नई शिक्षा नीति में लागू होने जा रही हैं।

सुझावः प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी चलाएं

नई शिक्षा नीति में शिक्षकों के सतत क्षमता विकास के लिए प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी को लगातार चलाने को कहा गया है।

अमलः शिक्षकों को स्कूलों से बाहर निकालकर प्रशिक्षण देने के बदले स्कूल में रहते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी के माध्यम से ही एक-दूसरे से सीखने के लिए समूह बनाया जााता हैे। छत्तीसगढ़ में विभिन्ना विषयों के लिए बहुत सारी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी बनाई गई है। इन सब लर्निंग कम्युनिटी को अभी हाल ही में व्यवस्थित किया गया है और वर्तमान में 5600 प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी का गठन कर लिया गया है। अभी ऑनलाइन वेबिनार के माध्यम से सतत क्षमता विकास का कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसमें 80 हजार शिक्षक जुड़े हैं।

आठवीं तक मातृभाषा में ही शिक्षा

सुझावः नई शिक्षा नीति के तहत पांचवीं तक और जहां तक संभव हो सके आठवीं तक मातृभाषा में ही शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।

अमलःछत्तीसगढ़ में 17 बोलियों में किताबें पढ़ाने को लेकर पहले से ही काम चल रहा है। गोंडी, हल्बी और माड़िया में भी पढ़ाई के लिए प्राइमरी स्कूलों के लिए कक्षा पहली से पांचवीं तक द्विभाषी किताबें छापी जा रही हैं। कहां, कौन-सी बोली बोली जाती है, यह जानने के लिए स्कूलों में लैंग्वेज मैपिंग की प्रक्रिया की गई है। यह सुझाव भी छत्तीसगढ़ से भेजा गया था। प्रदेश में 42 जनजातियों की 42 तरह की बोलियां हैं। फिलहाल 17 बोलियों पर सर्वाधिक फोकस है।

इन योजनाओं पर पहले से ही काम

लर्निंग आउटकमः राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने बच्चों के लिए लर्निंग आउटकम निर्धारित कर रखा है। इसके आधार पर छत्तीसगढ़ में पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों की किताबों में लर्निंग आउटकम के आधार पर एक्टिविटीज निर्धारित की गई है।

डिजिटल पढ़ाईः नई शिक्षा नीति में डिजिटल पढ़ाई कराने का फार्मूला लागू करने के लिए कहा गया है।

छत्तीसगढ़ में पहले से ही पढ़ई तुंहर दुआर ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 20 लाख बच्चों को पढ़ाया जा रहा है इसमें करीब 80 हजार शिक्षक भी जुड़े हुए हैं।

शिक्षा से व्यवसाय को जोड़नाः आने वाले समय में शिक्षा को अधिकतम व्यावसायिक रूप से जोड़ना है। इसके लिए छत्तीसगढ़ में इसी साल हायर सेकेंडरी स्तर पर 12वीं के बच्चों को आइटीआइ की पढ़ाई कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया। इस पर काम चल रहा है।

इनका कहना है

नई शिक्षा नीति में शिक्षा में लर्निंग कम्युनिटी, मातृभाषा में पढ़ाने का फार्मूला लागू करने के लिए कहा गया है। छत्तीसगढ़ में पहले से ही 17 बोलियों में किताबें पढ़ाने पर काम चल रहा हैे।

-डॉ .आलोक शुक्ला, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, छत्तीसगढ़

Posted By: Nai Dunia News Network

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