00 प्रदेश की पांच वामपंथी पार्टियां भी समर्थन देंगी

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

ये देश बिकाऊ नहीं है, कॉर्पोरेट भगाओ, किसान बचाओ और कर्ज नहीं, कैश दो के नारों के साथ रविवार को प्रदेश के 25 किसान संगठन आंदोलन करेंगे। यह आंदोलन अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और भूमि अधिकार आंदोलन के आह्वान पर होगा। इस दिन केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूर भी आंदोलन करेंगे। मजदूर-किसानों के इस आंदोलन को प्रदेश की पांच वामपंथी पार्टियों ने भी समर्थन देने की घोषणा की है।

किसान संघर्ष समन्वय समिति और भूमि अधिकार आंदोलन से जुड़े विजय भाई और छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस दिन इस देशव्यापी आंदोलन में शामिल सैंकड़ों किसान संगठनों का ज्ञापन भी प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा।

केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा ज्ञापन

ये ज्ञापन समन्वय समिति के दिल्ली कार्यालय में पहुंच चुका है। ज्ञापन के माध्यम से इस देश के किसानों की मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से कोरोना संकट के दौरान देश के गरीबों को खाद्यान्ना और नकद राशि देने, हाल ही में जारी किसान विरोधी तीन अध्यादेशों को वापस लेने, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और राष्ट्रीय परिसंपत्तियों को कार्पोरेटों को सौंपने की मुहिम पर रोक लगाने, सी-2 लागत के आधार पर किसानों को समर्थन मूल्य देने और उन पर चढ़े सभी कर्ज माफ करने, आदिवासी समुदायों को जल-जंगल-जमीन-खनिज पर हक़ देने और विकास के नाम पर उन्हें विस्थापित करना बंद करने, मनरेगा में 200 दिन काम और 600 रुपये मजदूरी देने, लॉकडाउन के कारण खेती-किसानी और आजीविका को हुए नुकसान की भरपाई करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को सार्वभौमिक बनाने और सभी लोगों का कोरोना टेस्ट किए जाने आदि मांगें प्रमुख हैं।

कई प्रमुख संगठन शामिल

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में इस आंदोलन में शामिल होने वाले संगठनों में छत्तीसगढ़ किसान सभा, आदिवासी एकता महासभा, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति, राजनांदगांव जिला किसान संघ, छग प्रगतिशील किसान संगठन, दलित-आदिवासी मंच, भारतीय किसान-खेत मजदूर संगठन, वनाधिकार संघर्ष समिति, धमतरी आदि प्रमुख हैं। विजय भाई ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सरकार भी केंद्र की तरह ही कोरोना महामारी और इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दुष्प्रभाव से निपटने में गंभीर नहीं है। साढ़े तीन लाख कोरोना टेस्ट में 11000 से ज्यादा लोगों का संक्रमित पाया जाना दिखाता है कि प्रदेश में कम-से-कम 7-8 लाख लोग संक्रमित होंगे, लेकिन वे स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच से दूर हैं। प्रवासी मजदूरों और ग्रामीणों को मुफ्त राशन तक नहीं मिल रहा है। बोधघाट और कोयला खदानों के निजीकरण के द्वारा आदिवासियों के बड़े पैमाने पर विस्थापन की योजना को अमल में लाया जा रहा है, जबकि वनाधिकार कानून, पेसा और 5वीं अनुसूची के प्रावधानों को क्रियान्वित नहीं किया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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