रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रदेश समेत राजधानी से सटे गांवों में जहां बेमौसम बरसात से किसानों को फसल की लागत को लेकर चिंता हो रही है, वहीं फसल के लिए बीमा करा चुके किसान संबधित बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर फोन करते हैं तो नंबर बंद बताता है। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। ज्ञात हो कि पिछले कुछ दिनों से बेमौसम बरसात हो रही है। इससे खेतों में धान की खड़ी फसल बिछ रही है, सर्वे के सुझाव आदि जानकारी के लिए फोन करते हैं तो नंबर बंद बता रहा है। इससे किसान काफी परेशान है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बागवानी फसलों के नुकसान पर बीमा कंपनियों से किसान दावा कर सकें, इसके लिए उद्यानिकी संचालनालय ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, लेकिन वह बंद है।

72 घंटों के भीतर कंपनी को सूचित करने

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार फसल बीमा कराने वाले ऐसे किसान, जिनकी फसल ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है, वे 72 घंटों के भीतर बीमा कंपनी को उसके टोल फ्री नंबर 180011 6515 पर सूचित कर सकते हैं। इसके अलावा क्षति की सूचना कृषक अपने संबंधित बैंक, स्थानीय उद्यानिकी विभाग, जिला अधिकारी को भी दे सकते हैं। सूचना मिलने पर बीमा कंपनी द्वारा क्षेत्र में फसल की हानि का अनुमान लगाने के लिए 48 घंटे के भीतर हानि निरीक्षक की नियुक्ति कर 10 दिवस के भीतर क्षतिपूर्ति का निर्धारण करने की सुविधा है।

सिर्फ कागजों में योजनाएं

बीमा कंपनी सर्वे करने के बाद 15 दिन के भीतर क्षति पूर्ति राशि का भुगतान किसानों को मिलने का प्रावधान है, लेकिन किसानों के हितों का ध्यान नहीं है। प्रचार प्रमुख नविन शेष, भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ की मानें तो लगभग एक हफ्ते से किसान भाई बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर फोन कर रहे हैं, लेकिन कृषि विकास एवं किसान कल्याण के अंतर्गत जारी नंबर ही बंद है। सिर्फ कागजों में किसान के लिए योजनाएं संचालित हो रही हैं।

उद्यानिकी फसल में शामिल उत्पाद

उद्यानिकी फसलों के लिए पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू है। इस योजना के अंतर्गत वर्तमान अवधि में कवर होने वाले अधिसूचित उद्यानिकी फसलों केला, पपीता, मिर्च, टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, प्याज और आलू शामिल हैं। राज्य में उद्यानिकी फसलों के बीमा के लिए मेसर्स बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को अधिकृत किया गया है।

वर्जन

टोल फ्री नंबर बंद है, इसके बारे में जानकारी नहीं है। अगर इस तरह की दिक्कत है तो जल्द पता कर सुधार करवाते हैं।

- आरएल खरे, उपसंचालक कृषि, रायपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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