संदीप तिवारी, रायपुर (नईदुनिया)। पूरी दुनिया इस समय साइबर फ्राड (धोखाधड़ी) का शिकार हो रही है। यह एक ऐसी समस्या है जिसके कारण कई बार अनजाने में लोग अपनी जीवन भर की कमाई गंवा देते हैं। इस वैश्विक समस्या के निवारण के लिए नेशनल इंस्टिट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एनआइटी) रायपुर के पूर्व छात्र मैकेनिकल इंजीनियर मयंक वर्मा ने ऐसा डाटा सिक्योरिटी प्रोग्राम विकसित किया है जो पूरी दुनिया को साइबर फ्राड से सुरक्षित करेगा।

दुनिया को सुरक्षित साइबर सिक्योरिटी प्रोग्राम की जरूरत महसूस हो रही थी, लिहाजा मूलतः बालाघाट मध्यप्रदेश के रहने वाले मयंक वर्मा डाटा स्वीकृति प्रोग्राम बनाने में जुट गए। लंदन में अनुसंधान को टीम के साथ आगे बढ़ाया और सफलता हासिल की। 'सिस्टम एंड मेथड्स फार आइडेंटिफाइंग एंड मिटिगेटिंग आउटलियर नेटवर्क एक्टिविटीज' के नाम से विकसित इस प्रोग्राम को अमेरिका ने चार अगस्त 2020 को पेटेंट किया। अमेरिका के पेटेंट एंड ट्रेडमार्क डिपार्टमेंट ने इसे विश्व का पहला और अपनी तरह का अनूठा अनुसंधान माना है। इस युवा इंजीनियर की तारीफ केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ने ट्विटर पर की है। अमेरिकी पेटेंट हासिल करने में मिली सफलता ने छत्तीसगढ़ के संस्थान की बौद्धिक प्रतिभा को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है।

ऐसे बचाएगा फ्राड से : इंजीनियर मयंक वर्मा के मुताबिक इस प्रोग्राम में ऐसे साइबर टूल्स डिजाइन किए गए हैं जो किसी भी तरह के साइबर फ्राड होते ही उसे डिटेक्ट (खोज) कर लेगा। वर्तमान में बैंकिंग, बीमा, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड, क्रेडिट-डेबिट कार्ड जैसी सेवाएं समेत विभिन्न मनी ट्रांजैक्शन के दौरान लोगों को साइबर फ्राड का शिकार होना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों जिस सर्वर पर काम हो रहा है उसमें यह साफ्टवेयर अप्लाई करने पर यह सुरक्षा प्रदान कर सकता है। यदि इसे किसी बैंकिंग सर्वर पर अप्लाई कर दिया जाए तो किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को डिटेक्ट कर देगा।

बढ़ रहा साइबर अपराध : छत्तीसगढ़ में जनवरी 2020 से अब तक साइबर अपराध के 200 मामले दर्ज हुए हैं। प्रदेश में करीब एक हजार तक मामले हैं। इनमें ज्यादातर मामले रकम के साथ हेराफेरी के हैं। 80 फीसद पढ़े-लिखे लोग ही शिकार हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक 2019 में भारत में साइबर अपराध से लोगों को 1.2 करोड़ रुपये से हाथ धोना पड़ा है।

टीमवर्क का नेतृत्व : युवा इंजीनियर मयंक वर्मा वर्तमान में नालेज और साफ्टवेयर कंपनी अर्नेस्ट एंड के डायरेक्टर हैं और गुड़गांव में रहते हैं। इससे पूर्व एसेंचर कंपनी में कार्य करने के दौरान उनकी टीम ने देश और दुनिया को साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में नया आयाम देने के लिए काम किया। एनआइटी रायपुर के एलुमनी संघ के अध्यक्ष केडी दीवान बताते हैं कि मयंक ने एनआइटी रायपुर से 2003 में मैकेनिकल इंजीनियर से पढ़ाई पूरी की।

Posted By: Prashant Pandey

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