NITI Aayog: रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्‍तीसगढ़ राज्य में समावेशी शहरी विकास मौजूदा शहरी क्षेत्रों व शहरों के आसपास के विकास क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किया जा सकता है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण व बुनियादी ढांचा विकास जैसी चुनौतियां भी हैं। इसका सामना करने के लिए तत्काल मास्टर प्लान लागू किया जाना चाहिए।

यह सुझाव राज्य में शहरी विकास और प्रबंधन के लिए गठित टास्क फोर्स ने दी है। इसका गठन नीति आयोग ने किया है। रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव क्षेत्र के बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए इन शहरों की दीर्घकालिक आवश्यकताओं के लिए विकास क्षेत्र की पहचान करने का सुझाव दिया है।

फोर्स की बैठक में राज्य के शहरों के सतत और व्यवस्थित विकास और इन कार्यों में आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में राज्य के शहरों में व्यवस्थित और संतुलित विकास, शहरीकरण की गतिशीलता और रोजगार संभावनाओं में वृद्धि के संबंध में अहम सुझाव दिए गए।

बैठक में बताया गया कि राज्य में आधे से ज्यादा शहरी लोग छह जिलों में हैं। इसके अलावा, 2001 से 2011 के दौरान, सरकार ने आदिवासी आबादी के उच्च प्रतिशत वाले पिछड़े जिलों में लगभग 75 नए शहर घोषित किए हैं।

यह राज्य सरकार की संतुलित शहरीकरण नीति का परिणाम है। प्रदेश में आसपास के राज्यों के कुशल प्रवासियों और वापस लौटने वाले प्रवासियों को अवसर प्रदान करने की जबरदस्त क्षमता है। आने वाले कुछ दशकों में अन्य राज्यों से पूंजी और कुशल जनशक्ति को आकर्षित करने के लिए राज्य के भविष्य के विकास की संभावना का संकेत देते हैं।

टास्क फोर्स के सदस्य पवन कुमार गुप्ता ने सभी यूएलबी (राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और प्रमुख जिला सड़कों) के चरणबद्ध विकास की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि राज्य की ग्रामीण संस्कृति और विरासत को खोए बिना शहरों का विकास किया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य की विरासत के अन्वेषण के लिए स्थलों के जीर्णाेद्धार और उनके रखरखाव का सुझाव देते हुए विरासत क्षेत्रों के निर्माण, कला और शिल्प बाजारों सहित सांस्कृतिक और वाणिज्यिक सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया।

प्रो. दीपेंद्र नाथ दास ने शहरों की स्थिरता और सतत विकास के लिए बुनियादी ढांचे की रखरखाव में आने वाली लागत को वसूल करने का सुझाव दिया। डा. पार्थ मुखोपाध्याय ने अपनी प्रस्तुति में यह बताया कि कस्बों को अधिक निवेश की आवश्यकता है क्योंकि छोटे शहरों में राजस्व क्षमता सीमित है। उन्होंने छोटे शहरों के परिवहन और क्षेत्रीय संपर्क के लिए छोटी बसों और अन्य परिवहन के साधनों का उपयोग करने का सुझाव दिया।

Posted By: Kadir Khan

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