रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केंद्र में आयोजित छह दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन मास्टर ट्रेनर डॉ. मैथिली, डिप्टी डायरेक्टर (स्ट्राइड) और डॉ. निशा सिंह, डिप्टी डायरेक्टर (शोध व विकास) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय नई दिल्ली ने ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षण लेने लाए 100 से अधिक शिक्षकों को बताया कि अब छात्र टेक्स्ट बुक से नहीं, बल्कि ओपन लाइब्रेरी यानी इंटरनेट लाइब्रेरी से पढ़ाई करना पसंद करते हैं। क्लास को रोचक बनाने के लिए इंटरनेट में अलग-अलग तरह के कंटेट को एकत्रित कर लें। इसका सीधा फायदा छात्रों, शिक्षकों दोनों को होता है। विषयवार कंटेंट तैयार करने के लिए इनका उपयोग किया जाता है। ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज के सभी प्लेटफॉर्म जैसे विकी एडुकेटर, ओईआर कॉमंस, कॉलेज ओपन टेक्सट बुक्स, ओपन कोर्स लाइब्रेरी, मेरलॉट बढ़ाने के सबसे अच्छे माध्यम हैं।

इन सॉफ्टवेयर की ई-क्लास में ले सकते हैं मदद

विश्व भर में चल रहे ओपन कोर्स वेयर प्लेटफार्म लुमेन लर्निंग, एमआइटी ओपन कोर्स वेयर, द ओपन अकादमी व अन्य कोर्स वेयर प्लेटफार्म सॉफ्टवेयर की मदद से छात्रों को बेहतर शिक्षा दी जा सकती है। ये सभी सॉफ्टवेयर ओपन कोर्स वेयर प्लेटफार्म है, जिनमें फ्री ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध होते हैं। अपने देश के ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज की पहल जैसे नेप्टेल, एनआरओइआर, टेस्स इंडिया, कोइर से अवगत कराया।

ये बरतें सावधानी

विशेषज्ञों ने बताया कि जो कंटेंट लेने में ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज में सावधानी बरतने के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि मूडल सॉफ्टवेयर में किसी भी तरह के कंटेंट को डाला न जाए। जो भी कंटेट वहां मौजूद हैं, उसे ही छात्रों को पढ़ाया जाए। इस सॉफ्टवेयर में विषय से संबंधित विडियो कंटेंट बनाकर शेयर करना, कोर्स कंटेंट को शेयर करना, यूजर क्रिएट कर जोड़ना भी महत्वपूर्ण है। इस ऑनलाइन साइट से बेसिक वर्जन में कई लोग जुड़ सकते हैं। आसानी से अपने विषय से संबंधित कोर्स को ऑनलाइन जारी करना सिखाया गया । मौके पर पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केसरी लाल वर्मा और अन्य प्राध्यापक मौजूद रहे।