राजकुमार धर द्विवेदी, रायपुर। Raipur Column dunia ke goath: विख्यात हास्यकवि काका हाथरसी मंचों पर एक कविता सुनाया करते थे, जो भारतीय सड़कों की दुर्दशा पर थी। एक बार वह पान चबाते हुए अमेरिका में टहल रहे थे। उस दौरान उन्होंने सड़क पर थूक दिया। फिर क्या था! दो सिपाही उन पर टूट पड़े। कक्का हक्का-बक्का रह गए। उन्होंने गिड़गिड़ाते हुए अपना अपराध पूछा तो एक सिपाही ने कड़ककर कहा, 'सड़क पर गंदगी किए हो और भोले-भाले बन रहे हो? चलो थाने, रुई की तरह धुन डालेंगे।"

यह सुनकर काका लगे हाथ-पांव जोड़ने। बतौर जुर्माना मोटी रकम देकर किसी तरह पुलिस के फंदे से छूटे। उन्होंने खुद से कहा, 'कान पकड़ता हूं कि अमेरिका कभी नहीं आऊंगा। सबसे बढ़िया अपने भारत की सड़कें, जहां चाहे जितना थूको, कचरा डालो, कोई कुछ बोलने वाला नहीं।" सच कहा था काका ने। रायपुर की ही सड़कों को देख लीजिए। जुर्माना भले लग जाए, लेकिन लोग सड़कों पर थूकने से बाज नहीं आते।

रोका-छेका को दिखा रहे ठेंगा

महीनों से रायपुर में रोका-छेका अभियान चल रहा है, लेकिन सड़कें मवेशियों से मुक्त नहीं हुईं। कहा तो यह गया था कि सड़क पर अगर कोई मवेशी दिखा तो सीधे नगर निगम के आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मवेशी घूमते हुए कहीं भी दिखाई दे जाएंगे। आप आते-जाते रहिए, सांड़ों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। एकदम मस्त जुगाली करते रहते हैं। उनके कारण जाम लग जाता है।

कोई सांड़ तनकर खड़ा हो जाए तो क्या मजाल कि कोई तीसमारखां भी उसके आजू-बाजू से निकल जाए। सड़कों पर जोधा बने घूमने वाले मवेशी घायल भी होते रहते हैं। फर्राटे भरने वाले वाहन चालक जब आदमी को नहीं बख्शते तो इन मूक जानवरों को क्या छोड़ेंगे? राहगीर भी जानवरों की वजह से घायल होते हैं। सरकार ने बेसहारा जानवरों के लिए गोठान बनवाए, लेकिन वहां बदइंतजामी है। तीज-त्योहार में ज्यादा दिक्कत होती है। कब दूर होगी परेशानी?

इंटरनेट मीडिया में बिछा ठगों का जाल

तीज-त्योहार के दौरान आनलाइन ठगी बढ़ गई है। ठगों ने इंटरनेट मीडिया में अपना जाल बिछा रखा है। आए दिन एक से बढ़कर एक चौंकाने वाली घटनाएं सामने आ रही हैं। अगर आप सजग नहीं हैं तो आपके खाते से हजारों-लाखों रुपये निकल जाएंगे, आप आकर्षक गिफ्ट के नाम पर ठग लिए जाएंगे, आपको सेवक-सेविका उपलब्ध कराने के नाम पर चूना लगाया जा सकता है। हर क्षेत्र में ठगी हो रही है।

गूगल बाबा में सुविधा केंद्रों को खोजना बंद करें। किसी अनजान पर भरोसा न करें। किसी भी प्रकार के लोभ-लालच में भी न आएं। दशहरा और दीपावली में तो खास तौर पर सचेत रहें। किसी अनजान आदमी का फोन आए तो आप बैंक संबंधी अपनी गोपनीय जानकारी उसे मत दें। प्राय: पढ़े-लिखे, समझदार लोग भी झांसे में आ जाते हैं और फिर ठगी के शिकार हो जाते हैं। एटीएम से पैसा निकालने जाएं तो सतर्क रहें।

एसी वाले शौचालय का सुख लेने की इच्छा

राजधानी में ऐसे शौचालय बनाए जाएंगे, जिनमें एसी की सुविधा होगी। जब यह खुशखबरी चिंतकजी ने सुनी है, तब से फूलकर कुप्पा हुए जा रहे हैं। इस संबंध में रोज ही निंदकजी से बातें किया करते हैं। निंदकजी आलोचना करते हैं तो चिंतकजी का माथा गरम हो जाता है। वे कहते हैं, 'भाई, इतनी अच्छी सुविधा मिलने वाली है। एक बार उसका सुख जरूर लूंगा। यहां गार्डन के शौचालय में घुसने का मन नहीं करता। लोगों ने इसे नरक बना रखा है। जितने भी सार्वजनिक शौचालय हैं, उनका बुरा हाल है।"

आज भी इस पर बात चली तो निंदकजी बोले, 'चिंतक महाराज, आप कैसे कह सकते हैं कि एसी वाले शौचालय भी अव्यवस्था से बचे रहेंगे? खूबसूरत शौचालय को नरक बनाने वाले वहां भी जा सकते हैं। यहां तो कितनी भी अच्छी सुविधा दे दो, लोगों की गंदी सोच से वह बेकार हो जाएगी। भाई, लानत है।"

Posted By: Shashank.bajpai

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