रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए वन विभाग ने पन्ना अभयारण्य की तर्ज पर काम करना शुरू कर दिया है। वन विभाग ने दूसरे प्रदेश से बाघ लाने का फैसला लिया है। बाघों को लाकर जंगल में ब्रीडिंग (इन सीटू ब्रीडिंग) कराई जाएगी। पन्ना गई दो आइएफएस अधिकारियों की टीम वापस लौट आई है। टीम ने पन्ना अभयारण्य में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए क्या किया गया, वहां के अधिकारियों ने कौन सी तकनीक का प्रयोग किया आदि की जानकारी जुटाई है। अब इन अधिकारियों ने प्लान बनाना शुरू कर दिया है। जल्द ही उस पर काम शुरू किया जाएगा।

ज्ञात हो कि वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया ने देश में बाघों की संख्या जारी की है, जिसमें छत्तीसगढ़ की स्थिति चिंतनीय है। यहां बाघों की संख्या 46 से घटकर 19 पहुंच गई है। बाघ घटने से वन विभाग सकते में आ गया। इसे गंभीरता से लेते हुए आनन-फानन में अधिकारियों को पन्ना अभयारण्य भेजा, ताकि वहां की तर्ज पर यहां बाघों की संख्या बढ़ाने का प्लान बनाया जा सके।

ऐसे बढ़े पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ

पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्ष 2009 में बाघ लगभग समाप्त हो गए थे। इसके बाद वहां के अधिकारियों ने बाहर से बाघ लाकर जंगल में लाकर छोड़ा, जिसके परिणाम सुखद आए। वर्तमान में पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 35 से 40 हो गई है।

यहां से लाएंगे बाघ

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए तेजी से काम शुरू हो गया है। पन्ना अभयारण्य, बांधवगढ़ या कान्हा से बाघ लाने की योजना विभाग बना रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति ली जाएगी।

प्रदेश में बाघों की संख्या वर्ष वार

2006 में 26

2010 में 26

2014 में 46

2018 में 19

वर्जन

प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए दूसरे प्रदेश से बाघ लाए जाएंगे। पन्ना से टीम वापस आ गई है। टीम ने इस पर काम शुरू कर दिया है। बाघों को लाने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति ली जाएगी। वहां से हरी झंडी मिलने पर लाए जाएंगे। -अतुल शुक्ला, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ , छत्तीसगढ़