रायपुर। भाजपा सरकार में एक कद्दावर मंत्री के करीबी ठेकेदार की संस्था की कांग्रेस सरकार में भी बल्ले-बल्ले है। यह संस्था रायपुर और बिलासपुर में बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसकर देती है। कांग्रेस की सरकार में भी इसने अपनी साठगांठ के बलबूते भोजन परोसने में कामयाबी हासिल की है। चर्चा है कि इस संस्था की ओर से स्कूली बच्चों को परोसे जा रहे भोजन की गुण्ावत्ता को लेकर कई बार कलेक्टर से भी श्ािकायत हुई, पर मामला दबकर रह गया। जिला प्रश्ाासन और स्कूल श्ािक्षा विभाग के अफसर इस संस्था के साथ अनुबंध खत्म होने के बाद भी इस पर पूरी तरह से मेहरबान हैं। श्ािकायतों को दबाने और संस्थान को काम देने की यह आतुरता कई सवालों को जन्म देती है। सरकार के निर्देश्ा हंै कि मध्याह्न भोजन की सामग्री महिला स्वसहायता समूह से खरीदी जाए। इस निर्देश्ा पर अमल करने के बजाय पुराने ढर्रे पर काम चल रहा हैं।

हजम हो रहा यूरोपियन 'कमीश्ान

योजनाएं भले ही बंद हो जाएं पर इस विभाग के एक अधिकारी का वित्तीय लेन-देन चलता रहता है। श्रेष्ठ पालकत्व की आड़ पर बुजुर्गों को भी पढ़ाने और साक्षर बनाने वाले इस विभाग के सहायक संचालक इन दिनों चर्चा में हैं। पुरानी योजनाओं की राश्ाि बचाकर अपने हिसाब से कार्यक्रम तय करने और दिल्ली, कोलकाता का टूर बनाने में माहिर ये अफसर खुद को वित्त अधिकारी मानते हैं। सरकार की ओर से इस विभाग में वित्ताधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है। इसका फायदा ये अधिकारी बखूबी उठा रहे हैं। अभी चर्चा कि इन्होंने अफसरों को झांसे में रखकर पढ़ना-बढ़ना कार्यक्रम की राश्ाि किसी दूसरे मद में खर्च कर दी है। यूरोपियन कमीश्ान का कार्यक्रम बहुत पहले ही बंद हो चुका है। इसके बाद भी ये अधिकारी इसकी राश्ाि का अभी तक इस्तेमाल कर रहे हैं। श्रेष्ठ पालकत्व की आड़ में केवल कमीश्ान के लिए प्रचार-सामग्री तैयार कर रहे हैं।

-------

तराजू में तौलना पड़ेगा काम

बच्चों की श्ािक्षा के उद्देश्य से नवाचार और अनुसंधान के लिए राज्य सरकार ने अलग से राज्य श्ौक्षिक अनुसंधान एवं प्रश्ािक्षण्ा परिषद गठित कर रखी है। यहां हर व्यक्ति को अकादमिक जानकारी के साथ-साथ उसमें रुचि भी होनी चाहिए। दुर्भाग्य इस बात का है कि कई ऐसे लोगों को यहां पदस्थ कर दिया गया है, जिन्होंने न ही कभी स्कूल में पढ़ाया है और न ही उन्हें लेखन का अनुभव है। ऐसे में अफसरों को भी कार्य विभाजन के समय दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। किसी को कोई काम ही नहीं दिया गया है तो कोई काम के बोझ से लद गया है। जिन्हें मलाईदार पद मिले हैं, वे तो साहब की तारीफों के पुल बांधने में लगे हैं और जिन्हें काम ज्यादा है, वे आक्रोशित भी हैं। लेकिन जिनके पास काम कम है, वे विभाग की कमजोरियांे की चर्चा करके 'निंदा-रस" का परम आनंद लेते रहते हैं।

मंत्री बंगले में फिर पहुंची विवाद की फाइल

महिला एवं बाल विकास विभाग में हुई पदोन्न्ति में गड़बड़ी का मामला विभाग के लिए अब गले की फांस बन चुका है। विभाग मेंपदस्थापना देख रहे एक विवादित अधिकारी की मनमानी के कारण्ा पूरे विभाग की छवि धूमिल हो रही है। चर्चा है कि इस गड़बड़ी को सही करार देने के लिए एक बार फिर अफसरों ने मश्ाक्कत करनी श्ाुरू कर दी है। फाइल मंत्री बंगले में भी भेजने की चर्चा है। इधर जिन लोगों ने इस गड़बड़ी को लेकर लिखित में श्ािकायत या अभ्यावेदन दिया है, उन्हें किसी भी बहाने प्रताड़ित करने की योजना भी बना ली गई है। जो अभी विभाग में हैं, उनको किसी न किसी बहाने एक अधिकारी नोटिस थमाने में लग गए हैं। बहरहाल देखना यह है कि विभाग में हुई इस चूक को सुधारा जाता है या फिर एक बार फिर एक बड़ी गलती करके विभाग के अफसर पहले की तरह ही जोखिम उठाएंगे।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close