रायपुर। चुनावी माहौल में प्रदेश में बिजली की आंख मिचौली मुद्दा बनी। विपक्षी आए दिन इसको लेकर सरकार पर हमला करते रहे हैं। इस बीच पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में बिजली कंपनियों में तबादलों में बड़े पैमाने पर खेल का खुलासा हुआ है।

कंपनी में तबादला नीति को दरकिनार कर मनमाने तरीके से स्थानांतरण आदेश जारी और निरस्त किए गए। इसकी वजह से शहरी क्षेत्रों में स्थित बिजली दफ्तरों में स्वीकृत से कई गुना ज्यादा स्टॉफ भर गए, जबकि ग्रामीण और सुदूर हिस्सों में कर्मियों का टोटा है।

बिजली कंपनियों का यह खेल नियंत्रक महालेखा परीक्षक यानी कैग की ऑडिट रिपोर्ट में उजागर हुआ है। कैग की टीम इस वर्ष मार्च में बिजली ट्रांसमिशन कंपनी का ऑडिट करने पहुंची थी। शहरों में भरमार और ग्रामीण क्षेत्रों में स्टॉफ की कमी पर कैग ने कंपनी प्रबंधन से जवाब तलब किया है।

कैग की इस आपत्ति के बाद कंपनी के अंदर ही घमासान शुरू हो गया है। कर्मचारी संगठनों ने स्थानांतरण नीति का सख्ती से पालन करने की मांग की है। पत्रोपाधी अभियंता संघ के एनआर छीपा का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में इसको लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

पहले तबादला, फिर बिना उचित वजह के ही निरस्त

बिजली कंपनियों में जिनती तेजी से तबादला आदेश जारी होता है, उतनी ही तेजी से उसमें बदलाव या निरस्त भी कर दिया जाता है। तबादला आदेश बदलने या निरस्त करने के लिए उचित वजह भी नहीं देखी जाती है। कैग ने भी अपनी आपत्ति में इस बात का उल्लेख किया है।

अध्यक्ष ने जारी किया कड़ा पत्र

कैग की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष शैलेंद्र शुक्ला ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पांचों बिजली कंपनियों को कड़ा पत्र जारी कर स्थानांतरण नीति 2018 का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। अध्यक्ष ने स्वीकृत पदों के अनुस्र्प कर्मचारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

नीति 2018 से लागू, पालन होगा 2021 से

बिजली कंपनियों में 2018 में स्थानांतरण नीति लागू की गई। इस नीति के क्लास 1.3 में कहा गया है कि कंपनी के सभी कर्मचारी और अधिकारी को अपनी पूरी सेवा के दौरान कम से कम दो वर्ष सुदूर क्षेत्रों में सेवा देनी होगी।

ऐसा नहीं करने वालों को पदोन्न्ति व उच्च वेतमान के लाभ से वंचित किया जा सकता है। इसमें आगे कहा गया है कि यह व्यवस्था 2021 से लागू की जाएगी। कैग ने इस पर कंपनी प्रबंधन से जवाब मांगा है कि जब नीति 2018 में लागू कर दी गई है तो इस व्यवस्था को लागू करने में 2021 का इंतजार क्यों किया जा रहा है।

Posted By: Sandeep Chourey