रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

लोकसेवा गारंटी के प्रकरणों को सुलझाने में विभागीय अधिकारियों की सांस फूलने लगी है। इसे तय समय पर सेवाओं को नहीं प्रदान कर पाने का अफसरों ने एक बहाना भी खोज लिया है। विभागीय आंकड़ों में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसमें नए वित्तीय वर्ष में नौ लाख 8546 आवेदन लोकसेवा गारंटी के तहत निराकरण के लिए आए थे। इसमें 57 हजार 111 आवेदन लोगों लौटा दिए गए। वहीं करीब 16 हजार 787 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। जन्म और जाति प्रकरण के आवेदनों के निस्तारण में तेजी दिखाई। बाकी के नामांतरण और सीमांकन समेत अन्य करीब सात हजार 108 प्रकरण लंबित हैं।

हैरतवाली बात है कि लंबित प्रकरणों को नहीं निपटाने वाले जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों पर कार्रवाई तक नहीं हुई, जबकि तय समय में आवेदनों का निस्तारण नहीं करने वाले अधिकारियों पर प्रतिदिन के हिसाब 100 रुपये जुर्माना वसूलने का प्रावधान है यानी अगर इसके तहत आने वाले आवेदन के निराकरण में 10 दिन की देरी होती है तो उस पर एक हजार रुपये जुर्माना लगाने के भी नियम हैं, लेकिन लंबित आवेदनों के जिम्मेदार 237 अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बता दें कि आठ माह पूर्व सरकार ने लोकसेवा गारंटी योजना के तहत तय समय में निराकरण नहीं करने वालों पर कार्रवाई हुई थी। उस दौरान सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस दिया गया था। इसके बाद कुछ दिनों तक विभागों ने चुस्ती दिखाई, लेकिन फिर पुराने ढर्रे पर सरकारी कामकाज होने लगे।

सिर्फ आपत्ति लगाने से प्रकरण अधर में

सीमांकन-बटांकन समेत जाति प्रमाण पत्र जारी करने के जैसे आवेदनों पर भी धड़ाधड़ आपत्ति लगाने से इनकी संख्या बढ़ी है। इसके बाद करीब 57 हजार आवेदनों लोगों को लौटा दिए गए। इसमें लाभ लेने वालों की पात्रता और संबंधित काम के दस्तावेज अपूर्ण होने के कारण बताकर आवेदन वापस करने का भी सिलसिला चला।

आवेदनों को कारण बताकर कर दिया निरस्त

ऐसे आवेदन थे, जिन्हें बिना कारण बताए ही निरस्त कर दिए। इसमें करीब 14 लोक सेवा से जुड़े लोग थे। बहरहाल, इसमें सुधार आदि करने के बाद वैसे फिर आवेदन जमा किए गए, जिन्हें फिर से अनुमोदित किया गया है।

तीन माह में ये प्रमाण पत्र देने के नियम

लोकसेवा केंद्र में जाति, निवास समेत भू-राजस्व से जुड़े दस्तावेज और प्रमाण पत्र देने के प्रावधान है। इसका उल्लंघन करने पर आवेदक शिकायत पर इस अधिनियम के तहत जिम्मेदारों पर 100 से एक हजार रुपये जुर्माने की कार्रवाई की जाती है।

निर्देशों का पालन करने में चूके

1-अधिनियम के पालन और निराकरण कराने के लिए अफसरों की तैनाती।

2-विभागीय कार्यालयों में एक-एक अफसर की नियुक्ति होनी है।

3-सरकारी कार्यालयों में दिए गए आवेदनों की स्थिति की सूचना के लिए बोर्ड भी लगाना था।

तय समयावधि में प्रमाण देने का प्रावधान

1-शासकीय इंजीनियरिंग कालेज के छात्रों के चरित्र प्रमाण पत्र और ट्रांसफर सात दिन में।

2-रोजगार पंजीयन उसी दिन होता है।

3-रोजगार कार्यालय को रिक्त स्थानों के लिए छह दिन में बेरोजगारों को सूचना।

4-जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सात दिवस में।

5-आवेदक को नल कनेक्शन तीन दिन में।

6-स्ट्रीट लाइट सात दिन में बदलना।

7-आवश्यक सफाई पांच दिन में।

8-गरीबी रेखा प्रमाण पत्र सात दिन में।

9-बुनकर सहकारी समितियों के वित्तीय प्रस्ताव 45 दिन में।

10-निवास प्रमाण पत्र सात दिन में।

11-जाति प्रमाण पत्र सात दिन में सहित अन्य सेवाओं का समय निर्धारित है।

वर्जन--

अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि लोकसेवा गारंटी योजना में किसी तरह की लापरवाही न की जाए। इसकी समीक्षा होगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

- डॉ. एस. भारतीदासन, कलेक्टर