रायपुर। सुकमा के भेज्जी में दो दिन पहले हुए नक्सली हमले की गूंज मंगलवार को विधानसभा में सुनाई दी। विपक्ष ने खुफिया सूचना होने के बावजूद हमला नहीं रोक पाने का आरोप लगाया। जवाब में गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा कि खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियानों की वजह से पिछले ढ़ाई वर्षों में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने ऐतिहासिक सफलताएं हासिल की है। यह आईबी, स्थानीय आसूचना तंत्र व सुरक्षाबलों की आपसी समन्वय से हुआ है।

विधानसभा में शून्यकाल में विपक्ष ने यह मुद्दा उठाया। डॉ. विमल चोपड़ा, भूपेश बघेल व सत्यनारायण शर्मा समेत पूरे विपक्षी सदस्यों ने सदन का काम रोक कर इस पर चर्चा की मांग की। स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल ने इस पर गृहमंत्री को वक्तव्य देने के लिए कहा। मंत्री के जवाब के बाद स्पीकर ने विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य में नक्सली वारदात लगातार बढ़ रहे हैं और सरकार उसे रोक पाने में असफल है। अपने वक्तव्य में गृह मंत्री पैकरा ने कहा कि नक्सलियों की गतिविधियों पर सरकार ने अंकुश लगाया है। उन्होंने कहा कि 2016 में सुरक्षाबलों के साथ 211 मुठभेड़ हुए थे। इस मुठभेड़ में 150 माओवादियों को मारने में सुरक्षाबलों ने कामयाबी हासिल की है। उन्होंने कहा कि 135 माओवादियों की बॉडी भी फोर्स ने रिकवर की।


फोर्स ने 3 हजार राउंड से ज्यादा की फायरिंग

18 फरवरी की घटना के संबंध में गृहमंत्री ने बताया कि भेज्जी के आगे चिंतागुफा तक 28 किमी सड़का का निर्माण किया जा रहा हे। यह क्षेत्र नक्सलियों के बटालियन नंबर 1 का क्षेत्र है। 10 दिन से वहां एसटीएफ और डीआरजी के जवान सुरक्षा दे रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही मौके से कुछ दूरी पर तैनात जवान उस तरफ बढ़े तो नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। डीआरजी ने दो हजार राउंड व एसटीएफ ने एक हजार राउंड फायर किया। इसके साथ ही अन्य हथियारों का भी प्रयोग किया गया। इससे न केवल नक्सली भाग गए बल्कि उन्हें भारी नुकसान भी हुआ है। दर्जनों मारे गए। घायलों को कंधे पर लादकर ले जाते हुए सुरक्षाबल के जवानोें और स्थानीय लोगों ने दखा हे।


श्रद्धांजलि देने नहीं जाते गृहमंत्री

विपक्ष ने गृहमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि घायलों को रायपुर में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, लेकिन गृहमंत्री उन्हें देखने तक नहीं गए। बघेल ने कहा कि यही नहीं मंत्री तक भी शहीद जवानों को श्रंद्धाजलि देने नहीं गए। उन्होंने सवाल किया कि क्या जवान सिर्फ शहादत के लिए ही हैं।

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