रायपुर (ब्यूरो)। विधानसभा का आगामी शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है। इसकी घोषणा विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने की। उन्होंने कहा कि 5 बैठकों में लगभग 21 घंटे 56 मिनट चर्चा हुई। इन बैठकों में 52 प्रश्न पूछे गए, जिनके उत्तर शासन द्वारा दिए गए। सत्र में 574 तारांकित प्रश्न, 370 अतारांकित प्रश्न मिले। इसी तरह 209 ध्यानाकर्षण में से 54 सूचनाओं को ग्राह्य किया गया। सत्र में स्थगन प्रस्ताव की कुल 64 सूचनाएं हासिल हुईं। शून्यकाल की 46 सूचनाएं मिलीं, इनमें से 37 सूचनाएं ग्राह्य और 9 सूचनाएं अग्राह्य रहीं। वर्तमान सत्र में 102 याचिकाओं में से 33 ग्राह्य, 40 अग्राह्या एवं 29 विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि अशासकीय संकल्प की 7 सूचनाओं में 2 ग्राह्य और 1 संकल्प सदन में चर्चा के बाद स्वीकृत किया गया। सत्र के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने कहा कि सूखे की संभावना के साथ सत्र की शुरुआत हुई थी, लेकिन अतिवृष्टि के साथ इसका समापन हुआ। उन्होंने युवा विधायकों की जमकर तारीफ की। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने विशेषाधिकार हनन के संबंध में कहा कि अभी बादल छंटे नहीं हैं। इस पर और मार्गदर्शन लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष सिर्फ विरोध करने के लिए नहीं है, बल्कि सार्थक चर्चा हो और प्रदेश की जनता ने जो दायित्व दिया है उसमें चूक न हो और जागरूक विपक्ष की भूमिका निभाएंगे।

विशेषाधिकार हनन विचारधीन

नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव और कांग्रेस प्रदेश एवं विधायक अध्यक्ष भूपेश बघेल के खिलाफ सत्ता पक्ष द्वारा लाया गया विशेषाधिकार हनन विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल के पास विचाराधीन है। सदन में उद्बोधन देते हुए ी अग्रवाल ने कहा कि समान्यतः राजनीतिक रूप से विपक्ष द्वारा सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, लेकिन प्रतिपक्ष ने इस बार अध्यक्ष के विरुद्ध पद से हटाने का संकल्प प्रस्तुत किया, जो संवैधानिक प्रावधानों के तहत विचार योग्य नहीं था और खारिज हो गया। ी अग्रवाल ने कहा कि मैं संकल्प लाने अथवा नहीं लाने के संबंध में किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन यह अवश्य कहना चाहता हूं कि आसंदी पर विराजमान व्यक्ति को उनके पद से हटाने के संबंध में संकल्प का प्रावधान संविधान में उल्लेखित है व इसका आशय सभा से संबंधित कार्यों के निष्पादन में निष्पक्षता से कार्य नहीं करने के आधार पर लाया जाता है, अथवा उनके अध्यक्षीय कार्यकाल के विषयों को आधार बनाकर। अध्यक्ष के पद को राजनीतिक क्रियाकलापों का लक्ष्‌य बनाना कहां तक उचित है यह विचार का प्रश्न है?

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