रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी ने मांग की है की सरकार किसानों को बारदाने एवं रकबे को लेकर होने वाली समस्या का तत्काल समाधान निकाले। पिछले वर्ष के बारदानों का भुगतान तत्काल किसानों को करें अन्यथा भारतीय किसान संघ पूरे प्रदेश में सरकार के विरोध में आंदोलन करेगा। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी धान खरीदी में किसानों को समस्याओं से दो चार होना पड़ेगा, क्योंकि सभी समितियों में जो दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

उन निर्देशों के अनुसार धान खरीदी के पहले दिन से ही 25 से 30 प्रतिशत बारदाने किसानों से ही लेने की बात कही गई है। इन दिशा निर्देशों के बाद व्यापारियों के चेहरे खिल गए है और किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खींच गई है। क्योंकि जैसे ही यह बात सामने आई की बारदाने की समस्या है रातों रात बारदाने की कीमतें आसमान पर पहुंच गई जो बारदाना 15 से 20 रुपये में मिलना चाहिए वह अब 35 रुपये का हो गया है जिसका पूरा भार किसानों पर ही आएगा।

किसानों का कहना है की हमें प्रति क्विंटल 100 रुपये का अतिरिक्त खर्च बारदानों पर करना होगा। धान का समर्थन मूल्य 1940 रुपये मिलना है वह अब बारदाने के खर्च के बाद 1840 रुपये ही मिलेगा क्योंकि 100 रुपये का खर्च बारदाने का बढ़ गया है। 100 रुपये के खर्च को इस प्रकार से समझा जा सकता है जैसे एक बारदाना 35 रुपये का तो एक क्विंटल धान के लिए तीन बारदाने की आवश्यकता होगी और तीन बारदाने का खर्च लगभग 100 रुपये आएगा। इसका भार तो किसानों के उपर ही आयेगा। किसानों का धान किसानों की सुविधा को देखते हुए प्लास्टिक की बोरियों में भी लेना चाहिए क्योंकि किसानों के पास प्लास्टिक बोरियां खाद उसमें आने के कारण उपलब्ध रहती है।

प्रदेश के किसानों से चर्चा के बादा किसानों का कहना की यदि बाहर से बारदाने किसानों को मिल सकते हैं तो सरकार क्यों व्यवस्था नहीं कर पा रही है। किसानों ने अपनी बात में यह भी कहा की सरकार ने पिछले वर्ष बारदाने का पैसा देने की बात की थी उसका भुगतान सरकार ने आज तक नहीं किया है। किसानों का कहना है अब हमें धान खरीदी को लेकर सरकार पर भरोसा नहीं रह गया है जिस प्रकार साफ्टवेयर की गड़बड़ी बताकर हजारों किसानों का रकबा काटा गया वो किसानों के साथ धोखा ही है।

इसके साथ ही एक नई समस्या किसानों के साथ आ रही है जिन किसानों की एक से अधिक ग्रामों में खेती है उन किसानों का एक से अधिक ग्रामों का पंजीयन एक ही समिति में कर दिया गया है। ऐसे में उस किसान को एक गांव से उसके दूसरे गांव की समिति में परिवहन करना होगा जिसमें वह अनावश्यक परेशान होगा और उसका खर्च भी बढ़ेगा।

Posted By: Ravindra Thengdi

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