रायपुर। आज युवा इंटरनेट गूगल और यू ट्यूब को डॉक्टर मानकर अपने इलाज के तरह-तरह के नुस्खे खोजते हैं। वहीं नुस्खे से भी डॉक्टर से जांच कराए बगैर ही दवाइयों का सेवन कर रहे हैं। इधर सर्द मौसम में बच्चों, बुजुर्गों की सेहत बिगड़ रही है। गली-मोहल्ले और अस्पतालों में मरीजों की कतार देखने को मिल रही है, लेकिन शहर के ज्यादातर डॉक्टरों के पास खासकर युवा वर्ग के लोग छोटे बीमारी के लिए 'गूगल बाबा' से सहायता लेकर जान से खिलवाड़ रहे हैं। यहां बिना सोचे-समझे दवाई और घरेलू नुस्खे खोजते हैं।

शहर के डॉक्टरों के मुताबिक मरीज जब आराम के बजाय सेहत और बिगड़ती है तो सीधे डॉक्टर के पास आ पहुंचे। ऐसे लोगों की संख्या में दिनोंदिन भी बढ़ रही है। शहर के डॉ. हर्षिता शुक्ला बताती है कि गूगल के ज्ञान से इलाज करने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रही है। जहां अभी हाल में करीब 40 प्रतिशत से अधिक मरीज इंटरनेट में गूगल और यूट्यूब से अपनी मनमर्जी से दवाई से सेवन करते है। लेकिन सेवन करने वक्त लोगों को नहीं मालूम रहता है कि यह सभी इंसान के लिए दवाई एक जैसा नहीं होता है।

इंटरनेट से वायरल पोस्ट से भी करते इलाज

सोशल मीडिया के दौर में कई यंगस्टर्स इंटरनेट में वायरल पोस्ट से अपने बीमारी की जानकारी जैसे ही मिलती है तो सीधे घरेलु नुस्खे अपनाकर अपना इलाज शुरू देते हैं। लेकिन कुछ दिन दिनों के बाद इसका असर दिखाई देने लगते है। वहीं इंटरनेट में मौजूद अंग्रेजी दवाएं ही नहीं, बल्कि नीम-हकीम, आदि घरेलु नुस्खे की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त मिल जाएगी। जहां लोग डाउनलोड करके और सोशल मीडिया में प्रचारित पोस्ट को डॉक्टर मानकर इलाज करवाना चाहता है, लेकिन इंटरनेट में मौजूद दवाई का इसकी कोई प्रमाणिकता और इसका कोई जिक्र नहीं होता है। मालूम हो कि इसका उद्देश्य किसी का भला करना नहीं, बल्कि अधिक से लाइक बटोरना रहता है। ऐसे में लोग बिना समझे इस वायरल फार्मूला को अमल कर लेते है। इससे वे उल्टे गंभीर बीमारी का शिकार हो जाते है।

डॉक्टरों को भी बताते है मरीज अपना फार्मूला

शहर के कुछ चिकित्सकों ने बताया कि सर्दी, जुकाम, खांसी के अलावा कुछ लोग ऐसे भी आते रहते हैं, जो उन्हें बिना जांच कराएं ही अपने रोग और उसकी दवाओं के बारे में बताने लगते है। जहां इंटरनेट में मौजूद फॉर्मूले तक बताते है। वहीं डॉक्टर मरीज की इलाज के सामान्य लक्षण, फैमिली हिस्ट्री, लाइफ स्टाइल, जांच रिपोर्ट को देखते हैं। इसके अलावा अपने स्तर से लोगों को जांच करने के खतरों के बारे में बताया जाता है।

केस-1

पैर की हड्डियां में दिक्कत थी, लेकिन करना पड़ा ऑपरेशन

डॉ. हर्षिता शुक्ला ने मरीज के बगैर के नाम छापने के शर्त पर बताया कि एक मरीज की पैर में थोड़ा का मोंच था। लेकिन इस दर्द को कम करने के लिए सीधे गूगल में वायरल पोस्ट और वीडियो को देखकर मेडिकल से दवाई लेना शुरु कर दिया। दवा को डॉक्टरों से भी चेक नहीं करवा। फिर कुछ दिन के बाद हड्डिुयां में दर्द और बढ़ने लगे। जहां मरीज ने गलत दवाई का चयन कर लिया था। इसका साइड इफेक्ट यह हुआ कि हड्डियां का आपरेशन करना पड़ा।

केस-2

मस्सा की दवा लेने से बना घाव

डॉ. भारत सिंघानिया ने बताया कि एक मरीज कुछ दिन पहले पहुंचे थे। जहां मस्सा के लिए गूगल से सहायता से दवाई का सेवन शुरू कर दिया, लेकिन आने दिनों में यह दवाई का शरीर में साइड इफेस्ट होने लगा। फिर शरीर में पूरे बड़े-बड़े घाव होने लगा। गूगल की ज्ञान से इनके शरीर में मस्सा से छुटकारा पाने के बजाय से पूरे शरीरभर घाव बन गया। जैसे थोड़े से सावधानी नहीं बरतने पर अब अधिक खर्च कर इलाज करवाना पड़ रहा है। इसके अलावा यंगस्टर्स चेहरे में दाग के लिए बिना सोचे समझे कई दवाइयां का इस्तेमाल करते है। बाद में इससे साइड इफेक्ट के कारण चेहरे में और दाग धब्बे बढ़ते जाते हैं।

केस -3

सर्दी के लिए खाई बुखार की दवा

शहर के चिकित्सक ने बताया कि कुछ महीने पहले एक युवक बलौदाबाजार जिले से क्लानिक में इलाज करवाने पहुंचे। लेकिन जब पहुंचे तो बताया कि पहले सर्दी था, लेकिन इंटरनेट की सहायता से दवा ढ़ूढ़े। फिर डॉक्टर के बिना परामर्श के लिए दवा का सेवन करने लगे। इसके बाद सर्दी कम नहीं हो रहे है। फिर अचानक सर्दी के कारण स्वास्थ्य भी बिगड़े लगे। इसके बाद चिकित्सक के पास जाना है। जहां पता चला कि यह दवा बुखार का था। इस कारण शरीर में साइड इफेक्ट होने लगे। जहां शरीरभर खुजली की बीमारी होने लगी। साथ ही पैर में बड़े-बड़े घाव बनाने लगे।

इंटरनेट में जो ज्ञान है वह लोगों के स्वास्थ्य संबंधित के लिए प्रायः खतरा होता है। लोगों को अपनी समस्या के लिए गूगल में टाइपिंग करते ही कई सारे लंबी-चौड़ी दवाईयों की फेहरिस्त सामने आने लगती है। लेकिन हर लोगों की दिनचर्चा, फैमिली लाइफ स्टाइल अलग-अलग होती है। जरूरी है कि आप गूगल से ज्ञान लेकर इलाज करवाना पसंद है तो एक बार अवश्य डॉक्टरों की सलाह लेकर दवाईयां का सेवन करना चाहिए। इससे आने वाले गंभीर बीमारियों से बचा जा सकते है। वहीं अभी 40 प्रतिशत अधिक पेरेट्स गूगल से ज्ञान लेकर पहुंचते है। जहां उनके शरीर में कई साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। - डॉ. हर्षिता शुक्ला, हड्डियां रोग विशेषज्ञ

- गूगल पर चेहरे में दाग-धब्बे आदि के बारे में प्रायः यंगस्टर्स नुस्खे ढ़ूढ़ते है, लेकिन इनको नहीं मालूम रहता है कि यह दवा उनके लिए कितना कारगार है। आज इससे संबंधित कई लोगों की जान जा चुकी है। गूगल के ज्ञान से लाभ है, लेकिन इसके अच्छी वेबसाइटों से पढ़कर और डॉक्टरों से सलाह लेकर सेवन करना चाहिए। इससे शरीर में कोई साइड इफेक्ट से बचा जा सकें। - डॉ. भारत सिंघानिया, चर्मरोग विशेषज्ञ

गूगल ने कह दिया डॉक्टर की मानें सलाह

इंटरनेट में उपलब्ध दवाओं की जानकारी के आधार पर इलाज करने की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने गूगल पहले से आगाह कर चुका है। अपनी चेतावनी में गूगल का कहना है कि लोग गूगल को डॉक्टर न मानें। यहां उपलब्ध जानकारी उद्देश्य लोगों को जागरूक करना मात्र है। इसके अलावा लिखा रहता है कि दवाओं की इस्तेमाल बिना चिकित्सकीय परामर्श से न करें।

कई जगह जा चुकी जानें

चिकित्सकों के मुताबिक गूगल में युट्यूब पर मौजूद कई वीडियो के कारण देश में कई जानें जा चुकी है। कुछ दिन महीने पहले यूपी में एक जच्चा-बच्चा की भी मौत हो गई। इसके अलावा प्रदेश के कई जगहों पर गूगल बाबा की ज्ञान से मौत होने का मामला सामने आया है। चिकित्सकों ने बताया कि जरुरी है कि आने-वाले दिन में इसके लिए लोगों को जागरूक भी कर रहे है कि दवाई लेने से पहले उन चीजों के बारे ज्ञान ले लेना चाहिए। जिसे शरीर में कोई साइड इफेक्ट न हो।

Posted By: Nai Dunia News Network