रायपुर(ब्यूरो)। दंतेवाड़ा जिले के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होने का मामला बुधवार को विधानसभा में उठा। कांग्रेस विधायक देवती कर्मा व अन्य विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री को घेरा। मंत्री ने विपक्ष से कहा कि डॉक्टर खोजकर ले आएं, नियुक्ति कर दूंगा। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक देवती कर्मा ने बस्तर संभाग के जिला अस्पतालों में नियुक्त संविदा चिकित्सकों के बारे में पूछा। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बस्तर संभाग में संचालित जिला अस्पतालों में वर्ष 2013 से 2010 तक 19 चिकित्सक संविदा में पदस्थ रहे। वर्ष 2010 में एक दंत चिकित्सक की संविदा अवधि पूर्ण होने के बाद पुनः नियुक्ति नहीं की गई है। एक संविदा दंत चिकित्सक को जगदलपुर चिकित्सा महाविद्यालय में दंत चिकित्सक की उपलब्धता होने तथा जिला चिकित्सालय जगदलपुर के क्रियाशील न होने के कारण संविदा अवधि समाप्ति के बाद पुनःनियुक्ति नहीं दी गई। सदस्य देवती कर्मा ने स्वास्थ्य मंत्री से कहा कि दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। डॉक्टर क्यों नहीं देना चाहते? क्या जिला अस्पताल दिखाने के लिए बनाया गया है? मंत्री ने माना कि डॉक्टरों की कमी है। कमी दूर करने के लिए बहुत से उपाय किए गए हैं। बस्तर भत्ता व ज्यादा वेतन भी दिया जा रहा है। सदस्य देवती कर्मा ने कहा कि मेरे बेटे को सांप ने कांटा, डॉक्टर नहीं होने के कारण झाड़फूंक करते जगदलपुर और उसके बाद रायपुर लाना पड़ा, तब जाकर बेटे की जान बची। कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने भी डॉक्टरों की कमी होने के मामले में मंत्री को घेरने की कोशिश की। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डॉक्टरों की भर्ती तकनीकी है। भर्ती पर न रोक है और न हम पीछे हट रहे हैं। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से कहा कि डॉक्टर खोजकर ले आएं, मैं नियुक्ति कर दूंगा। इस पर विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति की और मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया।