रायपुर । लॉकडाउन के दौरान बस्तर बैंड के संचालक और संस्थापक पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय घर पर ही समय व्यतीत कर रहे हैं। वे इन दिनों बस्तर की संस्कृति को पढ़ रहे हैं और विशेष प्रस्तुति पर काम कर रहे हैं। लौह शिल्प और जनजातीय परंपरा पर रिसर्च कर एक प्रस्तुति तैयार कर रहे हैं। इसमें परंपरागत संगीत, वाद्य यंत्रों की धुन और लोहे के औजारों की प्रस्तुति होगी। इसमें लौह अयस्क निकालने से लेकर उसे आकार देने तक के बारे में बताया जाएगा।

अनूप रंजन ने बताया-बस्तर में लौह शिल्प को लेकर कई मान्याएं हैं, जिन्हें आज की पीढ़ी नहीं जानती। इन्ही सब चीजों को प्रस्तुति में दिखाया जाएगा और उसका महत्व बताया जाएगा। एक दौर था जब बस्तर का नाम सुनते ही नक्सलवाद की छवि उभरती थी, इस छवि को अनूप रंजन ने अपने वाद्य यत्रों और संगीत के माध्यम से बदल दिया है। उन्होंने बस्तर की संस्कृति को न सिर्फ विश्व पटल पर पहुंचाया, बल्कि संगीत के माध्यम से लोगों को जोड़ा भी है। जब बस्तर बैंड के कलाकार 200 से अधिक वाद्य यंत्रों से धुन निकालते हैं तो लोग झूम उठते हैं।

जनजातियों पर लिखी किताबें पढ़ रहे

पद्मश्री अनूप ने बताया कि वे इन दिनों बस्तर और आसपास के कई इलाकों की जनजातियों पर लिखी पुस्तकें पढ़ रहे हैं। इस पर दस्तावेज भी जुटा रहे हैं। उद्देश्य यह है कि आगे इस पर काम किया जा सके। अपनी पुरानी रिकॉर्डिंग को सुनकर क्या बदलाव लाया जा सकता है इस पर मनन कर रहे हैं।

सुबह-शाम बेटी से सीख रहे गेम

पद्मश्री अनूप ने बताया कि वे घर में काम करते हुए जब थक जाते हैं तब पारंपरिक गीत सुनते हैं। रोज सुबह -शाम बेटी अनन्या पांडेय के साथ गेम खेलते हैं। दरअसल वे बेटी का साथ देकर उनसे गेम सीख रहे हैं। अनन्या स्क्वैश प्लेयर हैं, ऑल इंडिया में में उनकी चौथी रैंक और स्टेट में पहली रैंक है। अनन्या ने हाल ही में नेशनल में ब्रांज मेडल जीता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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