Pariksha Pe Charcha 2020 : आनंदराम साहू, रायपुर। ये हैं भारत की होनहार बेटी श्रिया सिंह। इन्होंने 20 जनवरी 2020 को कई मायनों में इतिहास रचा। नईदिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का इन्होंने अपने दो साथियों हृदया एस नायर बेंगलुरू और साहिल रांची के साथ मिलकर संचालन किया। राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम, जिसमें देश के प्रधानमंत्री संबोधित कर रहे थे ऐसे कार्यक्रम का संचालन साधारण काम नहीं था।

ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा श्रिया केंद्रीय विद्यालय नंबर-दो रायपुर में अध्ययनरत हैं। हिन्दी और अंग्रेजी में समानरूप से वाकपटुता की दक्षता से श्रिया को यह अवसर मिला। आइए जानते हैं श्रीया सिंह से कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर, बातचीत कर, उनके कार्यक्रम का संचालन करके श्रिया कैसा महसूस कर रहीं हैं? प्रस्तुत है खास बातचीत पर आधारित एक रिपोर्ट-

सवाल-श्रिया जी आपकी इस उपलब्धि के लिए बधाई। सबसे पहले अपने और अपने परिवार के बारे में बताएं?

श्रिया- मैं कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा हूं। मेरी माता नीता सिंह गृहिणी हैं। पिता अमिताभ आनंद एससीईआरटी के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस सिलसिले में हम लखनऊ से आकर रायपुर में रह रहे हैं। मेरे दादा-दादी लखनऊ में रहते हैं। मैं अपने माता-पिता की इकलौती बेटी हूं।

सवाल- परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में आपका चयन कैसे हुआ? इसके लिए क्या-क्या तैयारियां की?

श्रिया- 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत" कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर वाद-विवाद स्पर्धा के लिए मेरा चयन हुआ था। जिसमें मैंने प्रथम स्थान अर्जित किया। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में समान रूप से बात करने की क्षमता को परखकर मुझे परीक्षा पे चर्चा के लिए अवसर दिया गया। हम 14 जनवरी को रायपुर से नईदिल्ली पहुंचे थे। जहां चार दिन तक कठिन रिहर्सल के बाद ताल कटोरा स्टेडियम में मंच संचालन का अवसर मिला। इसके लिए मेरा, हृदया एस नायर और साहिल हम तीनों का चयन हुआ था।

सवाल- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर, हाथ मिलाकर और बातें करके आपने कैसा महसूस किया?

श्रिया- बेहद ही रोमांचक और प्रेरणादायक का पल था। प्रधानमंत्री मोदी जी को टीवी पर देखते थे। कल्पना नहीं किया था कि कभी सीधा उनसे मिल सकेंगे। उनसे मिलकर हमारे भीतर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। बातें करके बहुत प्रसन्नता का अनुभव हुआ। उनकी बातें आजीवन याद रहेंगी।

सवाल- आपको पता है,पूरा देश इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देख रहा था। करोड़ों लोगों की नजरें थीं। आपको घबराहट नहीं हुई?

श्रिया- सच कहूं तो रिहर्सल के दौरान मैं घबरा रही थी। अच्छे से नहीं कर पाने का मन में डर सा था। एक बार तो मैं रोने लगी। फिर पूजा शर्मा मैडम ने बड़ी ताकत दी। केंद्रीय विद्यालय के सभी अधिकारियों ने प्रोत्साहित किया। घबराहट दूर की। मंच पर आए, कार्यक्रम में मोदीजी के पहुंचने के पहले भी घबराहट और तनाव था। फिर जैसे ही मोदी जी मंच पर आए अंर्तमन से एक आवाज आई 'डर के आगे जीत है।" मोदी जी का ओजस्वी चेहरा देखकर मन प्रफुल्लित था। उन्होंने जितने स्नेह से हमसे बातें की तो उत्साह दुगुना हो गया और बेहिचक होकर हमने मंच संचालन किया।

सवाल- बड़ी होकर, पढ़-लिखकर क्या बनने का सपना है?

श्रिया- मेरा एक ही सपना है, मैं भारत की प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश बनना चाहती हूं। कानून की पढ़ाई में मुझे खास रूचि है।

सवाल- हमारे पाठकों, सहपाठी विद्यार्थियों के लिए आपका क्या संदेश है?

श्रिया- तनाव मुक्त होकर पढ़ाई करें। मैने जो अहसास किया है, वह सबसे कहना चाहती हूं। बिना घबराहट के मन लगाकर पढ़ाई करें। यह परीक्षा जीवन का एक पड़ाव मात्र है। डर के आगे जीत और जश्न है। किसी भी विषम परिस्थिति में हमें नहीं घबराना है। परीक्षा हाल में घबराने से परेशानी बढ़ती है। तनावमुक्त होकर पढ़ाई करें और परीक्षा दें। यदि असफलता मिलती है तो भी अगले बार और ज्यादा मेहनत करने का ठानें। गलत कदम नहीं उठाएं।

Posted By: Anandram Sahu

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