रायपुर Seed Company प्रदेश के 27 जिलों के किसानों को मक्का और धान का घटिया बीज देने वाली कंपनियों को 20 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। अवैधानिक प्रयोगशाला से बीज की डीएनए जांच कराने के कारण भुगतान रोकने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद मंत्रालय और सचिवालय के अधिकारियों की मिलीभगत से आज तक हाइब्रीड धान-आरसी 53 और हाइब्रीड मक्का-आरसी-54 के भुगतान धड़ल्ले से किया जा रहा है।

विधानसभा में घटिया बीज किसानों में बांटे जाने का मुद्दा गरमाया तो फाइलें चलीं, लेकिन जिम्मेदार कंपनी और अफसरों की जबावदेही तय ही नहीं हो पाई। सिर्फ भुगतान रोके जाने का आदेश दिया गया। सभी कृषि संचालकों को कहा गया कि इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के पादप आण्विक जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी की प्रयोगशाला से ही मार्कर और डीएनए की जांच कराई जाए।

हैरत वाली बात है कि प्रदेश के करीब ढाई लाख किसानों में घटिया हाइब्रीड धान और मक्का का बीज बांट दिया गया, क्योंकि इनकी पैदावार कागजी मानक से काफी कम है। ऐसे में किसानों के साथ पिछले दो सालों से धड़ल्ले से घटिया बीज के नाम पर ठगी की जा रही है, लेकिन उच्चाधिकारियों की चुप्पी चौंकाने वाली है।

सूत्रों के मुताबिक कुल 35 करोड़ रुपये के बीज की खरीदी हुई थी। विधानसभा में मामला उठने के बाद आनन-फानन में इसे वापस लेने की कवायद तो शुरू हुई, लेकिन तब तक करीब 20 हजार क्विंटल धान और मक्का बीज खेतों में खप गया था।

जांच कमेटी तक बनाना मुनासिब नहीं समझा

प्रकरण उजागर होने के बाद कृषि मंत्रालय और सचिवालय स्तर के उच्चाधिकारियों ने जांच के नाम पर कमेटी तक बनाना मुनासिब नहीं समझा। सूत्रों के मुताबिक कंपनियों की पकड़ सत्ता के गलियारे तक गहरी पकड़ हैं। इन पर कार्रवाई के करने के लिए कोई भी नोटशीट चलाने के लिए मंत्रालय का पूरा हस्तपक्षेप होता है। ऐसे में अधिकारी भी विवश हैं, क्योंकि अगर कार्रवाई हुई तो इस मामले में कई अधिकारी नप जाएंगे।

नेता प्रतिपक्ष बोले- कृषि मंत्रालय में भ्रष्टाचार चरम पर, कंपनियों के आगे मंत्री भी बेबस

विधानसभा में11 अक्टूबर, 2019 को नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने उठाया था। उन्होंने कहा कि इस पर कार्रवाई के करने बजाय कृषि मंत्री चुप्पी साधे हुए हैं, जो हैरतवाली बात है। इस मामले में कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि मंत्री कंपनियों के आगे बेबस हैं। इसके पीछे कारण है, भ्रष्ट अधिकारियों के चंगुल में मंत्री फंस चुके हैं।

- इस पर कुछ कार्रवाई हुई थी। अगर भुगतान किया जा रहा है तो गंभीर विषय है। जांच कराऊंगी। - मनिंदर कौर द्विवेदी, आयुक्त, कृषि उत्पादन

Posted By: Nai Dunia News Network

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