दीपक अवस्थी, रायपुर। प्रदेश की कलाकृति का डंका देश भर में बज रहा है। अटल नगर स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी औद्योगिक परिसर के पास मूर्तिकार पीलूराम साहू पूरी खामोशी से सीमेंट की कलाकृतियां 28 साल से बना रहे हैं। उन्होंने कभी इसका प्रचार करने की कोशिश नहीं की, मूर्तियां खुद ही बोल कर कला का मोल बता रही हैं। वे देश के 29 राज्यों में महात्मा गांधी और भगवान की मूर्तियों की छटा बिखेर रहे हैं।

प्रदेश की सबसे लंबी और ऊंची हनुमानजी की मूर्ति भी पीलू ने तैयार की है। वहीं उन्होंने महात्मा गांधी की 150 मूर्तियां अलग-अलग रंगों में बनाकर दी हैं, जो देश के कोने-कोने राष्ट्रभक्ति का संदेश दे रही हैं। वहीं पर्यटन के नाम से चिन्हांकित मुक्तांगन में लगी बस्तर से लेकर सरगुजा की कलाकृतियां भी पीलू के हाथों का हुनर बता रही हैं।

ऐसा मूर्तिकार, जो भरता है टैक्स

पीलूराम साहू बताते हैं कि ज्यादातर मूर्तिकार टैक्स के दायरे में नहीं आतीं, क्योंकि वह कच्चा काम होता है। वहीं मैं पहला मूर्तिकार हूं, जो प्रति वर्ष आयकर भरता हूं। कारण ये है कि मेरी मूर्ति मिट्टी की नहीं, सीमेंट की होती हैं। कई मूर्तियों में एक से दो ट्रक तक सीमेंट और हजारों टन सरिया लग जाता है। इसके साथ ही सरकार विभिन्न चौक-चौराहों के लिए मूर्ति खरीदती है, इसके लिए बिना जीएसटी नंबर के बेच पाना संभव नहीं होता।

प्रदेश की सबसे बड़ी हनुमान की मूर्ति बनी यहीं

प्रदेश के पर्यटन स्थल चंपारण में 85 फीट ऊंची खड़ी हनुमान जी की मूर्ति पीलू राम ने तैयार की है। उन्होंने बताया कि डेढ़ करोड़ की लागत से बनी मूर्ति में 45 लाख तो कारीगरों का भुगतान हुआ। तीन से चार सौ टन तक इस मूर्ति में सरिया लगा। मूर्ति को बनाते समय 300 कामगारों को बैठाकर एक-एक हिस्सा तैयार कराया गया था। वहीं करीब तीन से चार ट्रक सीमेंट इस मूर्ति में लग गया।

महात्मा गांधी की बनाईं 150 मूर्तियां

पीलू बताते हैं कि देश के अन्य राज्यों में सबसे ज्यादा महात्मा गांधी की मूर्ति की मांग है। करीब सभी राज्यों में अपनी बनाई मूर्ति को लगते देख चुका हूं। 150 से अधिक मूर्ति देश के कोने-कोने लग चुकी है। खास बात ये रही कि इन मूर्तियों के लिए आम-जनों ने अलग-अलग रंग की फरमाइश की।

दक्षिण भारत में भूरे रंग में महात्मा गांधी की मूर्ति की ज्यादा मांग रही। वहीं महाराष्ट्र गोवा व अन्य राज्यों में सफेद रंग में। वहीं लागत की बात की जाय तो सबसे कम लागत की मूर्ति तीन हजार की बनती है। वहीं अधिक लागत की कोई सीमा नहीं है। जितनी लंबी मूर्ति, उतना ज्यादा रुपया लगता है।

परसकोल की शान बनेगी कबीर की मूर्ति

पीलू अभी 12 लाख की 20 फीट मूर्ति कबीर दास की बना रहे हैं। उनका कहना है कि आरंग के पास परसकोल के गांव वालों ने चंदा करके इस मूर्ति को बनाने का ऑर्डर दिया है। इसे तैयार करने में अभी पांच महीने हो चुके हैं। तीन-चार महीने में तैयार हो जाएगी।