नंबर गेम

3500 से अधिक शवों का वर्ष भर में होता है पीएम

18 चिकित्सकों की पीएम डिपार्टमेंट को जरूरत

05 चिकित्सक 24 घंटे सेवा देने में डटे

रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच आंबेडकर अस्पताल में बिना सुरक्षा के चिकित्सक पीएम करने को मजबूर हैं। संसाधनों की कमी से चिकित्सकों पर खतरा मंडराने लगा है।

आंबेडकर अस्पताल की मरच्यूरी में पोस्ट मार्टम के लिए जो शव आते हैं, उनमें से 90 फीसद से अधिक की मौत किसी न किसी गंभीर बीमारी से हुई होती है। ऐसी स्थिति में पोस्ट मार्टम विभाग में कार्यरत चिकित्सकों और कर्मचारियों के पास सुरक्षा के संसाधन जैसे पीपीई किट और मास्क की कमी है। चिकित्सकों ने बताया कि जो गंभीर बीमारी से ग्रसित थे, उनके शव के पीएम से संक्रमण के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि अधिकांश फ्लू, बुखार, निमोनिया के शिकार रहते हैं। पीपीई किट और एन-95 मास्क जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराने की मांग लगातार चिकित्सकों द्वारा की जा रही है। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इनकी उपलब्धता पर्याप्त है।

संक्रमित या संदेही की नहीं करना है पीएम

चिकित्सकों ने बताया कि केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसार संक्रमित शव का पीएम नहीं करना है। यदि बहुत जरूरत है तो पर्याप्त सुरक्षा के साथ ही किया जाएगा। संदेही शव की भी कोरोना रिपोर्ट आने के बाद ही पोस्ट मार्टम किया जाना है।

हर दिन 10 शव को होता है पीएम

चिकित्सकों ने बताया कि हर दिन लगभग 8 से 10 शवों का पोस्ट मार्टम किया जा रहा है। इसके लिए अस्पताल में सिर्फ पांच चिकित्सक हैं। प्रत्येक वर्ष आंबेडकर अस्पताल में 3500 से अधिक पोस्ट मार्टम हो रहे हैं। विभाग में 13 चिकित्सकों की और जरूरत है।

कोरोना संदेही शव, रिपोर्ट आई तब हुआ पीएम

चिकित्सकों ने बताया कि हाल ही में तीन केस ऐसे थे, जो कोरोना के संदेही थे। ऐसे में उनके सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद भी पोस्ट मार्टम किया गया। बीमारी से मौत के बाद शव पोस्ट मार्टम के लिए पहुंचता है तो कुछ परिजन के मन में कोरोना को लेकर भय रहता है। कुछ मामले ऐसे रहे, जिसमें पीएम के बाद परिजन शव को ले जाने में आनाकानी करते रहे। पुलिस की मदद से शव को उन्हें सौंपा गया।

वर्जन

शव के पीएम के दौरान कई तरल पदार्थ निकलते हैं। अधिकांश केस में किसी न किसी गंभीर बीमारी से मौत हुई होती है। ऐसे में कोरोना संक्रमण किसे है और किसे नहीं, सैंपल की जांच रिपोर्ट मिलने से पहले कैसे कहा जा सकता है। सुरक्षा के लिए चिकित्सकों के साथ सभी कर्मचारियों को पीपीई किट व एन-95 मास्क जैसे संसाधन की जरूरत है। इसके लिए हमने प्रबंधन को पत्र लिखकर अवगत कराया है। -डॉ. स्निग्धा जैन, विभागाध्यक्ष, फोरेंसिक मेडिसिन, आंबेडकर अस्पताल

वर्जन

शव के पोस्ट पार्टम के दौरान तभी कोरोना की जांच की जाएगी, जब संदेही हो। हर दिन आठ से 10 शव पीएम के लिए पहुंच रहे हैं। हम किस किस की जांच करेंगे। जहां तक चिकित्सकों को पीपीई किट का सवाल है, पोस्ट मार्टम करने वाले चिकित्सकों को जरूरत नहीं है। जो मरीजों का इलाज कर रहे हैं उन चिकित्सकों को पीपीई किट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई गई है।- डॉ. विनीत जैन, अधीक्षक, आंबेडकर अस्पताल

Posted By: Nai Dunia News Network

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