रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर 25 मई 2013 को बस्तर के झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले की नौवीं बरसी से पहले एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों एक-दूसरे पर घटना का सच उजागर नहीं होने देने का आरोप लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कह रहे हैं कि भाजपा सच सामने लाने में अड़ंगा लगा रही है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक कांग्रेस पर इस मामले को लेकर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं। उधर, पीड़ित आज भी सच्चाई से पर्दा उठने का इंतजार कर रहे हैं।

सीएम बघेल बोले- सच सामने लाने में अड़ंगा लगा रही भाजपा

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि भाजपा सरकार में किसी भी जांच एजेंसी ने इस राजनीतिक साजिश की जांच नहीं की। इसलिए सरकार ने एसआइटी का गठन किया है, लेकिन एनआइए केस फाइल नहीं दे रही है। वहीं नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि झीरम घाटी की घटना में हम सबने प्रदेश के महत्वपूर्ण व्यक्तियों को खोया है। पद हमारे लिए कभी राजनीतिक मुद्दा नहीं रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे पर हमेशा राजनीति करती है। झीरम का सच सामने आना चाहिए।

भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर कहते हैं कि एसआइटी की जांच से पहले मंत्री कवासी लखमा का इस्तीफा होना चाहिए, क्योंकि वे घटना के प्रत्यक्षदर्शी हैं। ऐसे में राज्य सरकार की कोई भी जांच एजेंसी उनसे कैसे पूछताछ कर सकती है। वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम घाटी कांड के षड्यंत्रकारियों को सजा मिले और पीड़ित पक्ष को न्याय मिले।

बता दें कि इस नक्सली हमले में 32 लोगों की जान गई थी। इनमें कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा समेत अन्य जनप्रतिनिधि व सुरक्षाबल के जवान शामिल थे।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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