Raipur Local Edit: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई सकारात्मक निर्णय लिए गए, जिससे उम्मीद जगती है कि सरकार आम लोगों की समस्याओं और उनके समक्ष पेश चुनौतियों को समझ रही है। इनमें सबसे चर्चित डीजल और पेट्रोल की कीमतों में कमी के लिए वैट कम करने का फैसला है। यद्यपि इससे उपभोक्ताओं को एक से डेढ़ रुपये प्रति लीटर की ही बचत होगी, परंतु प्रदेश सरकार को होने वाली आय में एक हजार करोड़ रुपये की कमी का अनुमान लगाया गया है।

शिक्षकों के हित में लिए गए निर्णय भी सराहनीय हैं, जिसके तहत संविलियन का लाभ पाने वाले शिक्षकों की पदोन्न्ति के लिए नियमों को शिथिल करते हुए पांच वर्ष की जगह तीन वर्ष की सेवा का प्रविधान किया गया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार के स्तर पर निर्णय लेने में देरी और भर्ती प्रक्रिया में अड़चनों की वजह से भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बनेगी।

शासकीय चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी में प्राध्यापकों और सह प्राध्यापकों की लोकसेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के साथ कालेजों के संविदा शिक्षकों के लिए की गई व्यवस्था भी लाभकारी होगी, परंतु इस बात का विश्लेषण किए जाने की जरूरत है कि ऐसी व्यवस्था करने की बार-बार जरूरत न पड़े।

चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कालेजों में रिक्त पदों के कारण केवल वर्तमान ही प्रभावित नहीं हो रहा है, भविष्य के डाक्टरों की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। सरकार की तरफ से ठोस प्रयास किए जाने चाहिए कि शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में नियुक्तियों की प्रक्रिया फाइलों में न फंसे। इन सबके बीच सहकारी समितियों की हड़ताल की समाप्ति भी राहत वाली बात रही। मंत्रिमंडल के सकारात्मक फैसले के बाद आठ नवंबर से चल रहे गतिरोध का समाप्त होना राहत भरा है।

अब उम्मीद की जानी चाहिए कि एक दिसंबर से धान खरीद के लिए आवश्यक व्यवस्था जल्द से जल्द कर ली जाएगी, ताकि किसी स्तर पर समस्या न आए। सरकार ने धान उपार्जन वर्ष 2020-21 में कोरोना संकट के कारण सहकारी समितियों को हुए नुकसान से बचाने के लिए तथा उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए एकमुश्त 250 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति सहायता राशि प्रदान करने का प्रविधान कर राहत की तात्कालिक व्यवस्था की है। उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसी समस्या बार-बार न आए।

इसके लिए जरूरी है कि उपार्जन केंद्रों में क्रय धान का निराकरण त्वरित गति से किया जाए। धान उठाव की नियमित समीक्षा जरूरी है, ताकि उपार्जन केंद्रों से धान का ससमय उठाव हो। खाद व्यवसाय से जुड़ी समितियों को हो रहे नुकसान का भी तार्किक समाधान होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने जिस सकारात्मकता के साथ समस्या समाधान के लिए पहल की है, उससे स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त होता है।

Posted By: Kunal Mishra

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