रायपुर (नई दुनिया प्रतिनिधि) वर्तमान में पूरे विश्व को भयभीत करने वाली कोरोना जैसी महामारी की भविष्यवाणी आज से लगभग 10 हजार वर्ष पूर्व 'नारद संहिता' में कर दी गई थी। साथ ही यह भी उल्लेखित किया गया है कि महामारी का प्रकोप किस दिशा से होगा और नवरात्रि के बाद धीरे धीरे खत्म होने लगेगा। संत महासभा छतीसगढ़ के अध्यक्ष एवं सुरेश्वर महादेव पीठ के संस्थापक महामंडलेश्वर स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती के अनुसार नारद संहिता में उल्लेख है कि 'भूपाव हो महारोगो मध्य स्यार्धवृष्ट य। दुखिनो जंत्व सर्वे वत्स रे परी धाविनी' अर्थात परी धावी नामक संवत्सर में राजाओं में परस्पर युद्घ होगा और महामारी फैलेगी । बारिश असामान्य होगी और सभी प्राणी महामारी को लेकर दुखी होंगे। स्वामी राजेश्वरानंद के अनुसार बृहत संहिता में वर्णन आया है कि ' शनिश्चर भूमिप्तो स्कृद रोगे प्रीपिडिते जना' अर्थात जिस वर्ष के राजा शनि होते है उस वर्ष में महामारी फैलती है । विशिष्ट संहिता में वर्णन प्राप्त हुआ कि जिस दिन इस रोग का प्रारम्भ होगा उस दिन पूर्वा भाद्र नक्षत्र होगा महाराज के अनुसार 26 दिसंबर 2019 को पूर्वाभाद्र नक्षत्र था उसी दिन से महामारी का प्रारंभ हो गया था। यह महामारी पूर्व दिशा में स्थित चीन देश से फैली है, यह संकेत भी नारद संहिता में दिया हुआ है। नवरात्र के बाद प्रकोप होगा कम

विशिष्ट संहिता के अनुसार इस महामारी का प्रभाव तीन से सात महीने तक रहेगा, परंतु नव संवत्सर के प्रारम्भ से इसका प्रभाव कम होना शुरू हो जाएगा अर्थात भारतीय नव संवत्सर जिसका नाम प्रमादी संवत्सर है, जो कि 25 मार्च से प्रारंभ हो रहा है। इसी दिन से महामारी का प्रभाव कम होना शुरू हो जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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