रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग अब पहली से लेकर 12वीं तक के बच्चों को मुफ्त पढ़ाई के लिए नीति बना रहा है। इसके तहत अब 12वीं तक बच्चों को छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम से प्रकाशित किताबें मुफ्त दी जाएंगी। इसमें निगम को करीब 15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। हालांकि अभी तक पहली से 10वीं तक के बच्चों को ही फ्री किताबें देने के लिए निगम को निर्देश मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि नीतिगत निर्णय कैबिनेट में लिया जाएगा।

स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने इस मामले में नईदुनिया से चर्चा में कहा कि राज्य सरकार ने 12वीं तक बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का संकल्प लिया है। इसके तहत किताबें भी दी जाएंगी। बता दें कि राज्य में 11वीं-12वीं में एनसीइआरटी की किताबें लागू करने के बाद महंगी किताबों के कारण छात्र-छात्राओं को हायर सेकेंडरी की पढ़ाई करना ही मुश्किल हो गया है।

समग्र शिक्षा अभियान के दायरे में पहली से 12वीं

गौरतलब है कि इस साल केंद्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान लागू करके राज्य सरकारों पर बच्चों को पहली से लेकर 12वीं तक पढ़ाने की जिम्मेदारी दे दी है। इसके तहत सभी बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास ही है। गौरतलब है कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत पिछली सरकार में छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम की ओर से राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें रायल्टी की कटौती करके सभी बच्चों को मुफ्त किताबें देने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन राज्य शासन ने इस पर कोई विचार नहीं किया था।

कॉलेजों में मुफ्त शिक्षा, लेकिन स्कूल में ही महंगी पढ़ाई

प्रदेश की बालिकाओं को कॉलेज में पहले से ही मुफ्त शिक्षा दी जा रही है, दूसरी तरफ हायर सेकंेडरी स्तर पर छात्राओं को मुफ्त किताब देने का निर्णय नहीं होने से सरकारी नीतियों में विरोधाभास है। लड़कियों को स्नातक तक मुफ्त शिक्षा देने की योजना है, लेकिन 11वीं-12वीं की किताबें ही भारी पड़ रही हैं। आलम यह है कि 11वीं की सिर्फ किताबें में ही दो हजार रुपये में मिल रही है। ऊपर से कॉपियां और प्रायोगिक सामग्री के अभाव में युवा वैज्ञानिक की सोच रखने वाले विद्यार्थियों के सपने को तगड़ा झटका लग रहा है। किताबें महंगी होने से ज्यादातर बच्चे पढ़ाई ही नहीं कर पाते हैं।