रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 45 साल पुरानी संस्था आंध्रा एसोसिएशन का चुनाव गत दिनों विधिवत संपन्न हुआ था। इसमें आंध्रा समाज के निर्विरोध अध्यक्ष जी.स्वामी समेत अन्य कार्यकारिणी चुनीं गई थी। चुनाव संपन्न हो जाने के बाद अब विरोध के स्वर शुरू हो गए हैं। एक पक्ष का कहना है कि चुनाव गलत तरीके से किया गया, वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि चुनाव विधिवत हुआ है, कुछ विरोधियों द्वारा साजिश रचकर समाज की छवि धूमिल की जा रही है।

प्रेसवार्ता में आंध्रा समाज के कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि एक पक्षीय चुनाव में नई कार्यकारिणी गठित की गई है, जो गलत है। इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए अध्यक्ष जी.स्वामी का कहना है कि चुनाव संयोजक बी.श्रीनिवास राव ने नामांकन वापसी के बाद शेष बचे प्रत्याशियों की घोषणा की है। कुल 48 नामांकन पत्र खरीदे गए थे। 19 दिसंबर तक नामांकन जमा करना था। 21 दिसंबर को 16 वैध नामांकन की सूची जारी की गई।

24 दिसंबर को चुनाव संचालक द्वारा सूचना पटल पर एक पक्षीय नामांकन को स्वीकार करते हुए 14 लोगों की निर्विरोध सूची जारी की। 25 दिसंबर की बैठक चुनाव संचालक ने निरस्त की और 9 जनवरी को चयनित उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र जारी करने की बात कही। फर्म एवं सोसाइटी ने प्रमोद कुजूर को छह साल के वित्तीय जांच करने जांच अधिकारी नियुक्त किया। चुनाव संचालक बी.श्रीनिवास राव ने द्वेषपूर्ण तरीके से आंध्रा एसोसिएशन के लेटर पैड पर 8 जनवरी को चुनाव को अवैध कर रद्द कर दिया।

निर्विरोध अध्यक्ष जी.स्वामी का कहना है कि आंध्रा एसोसिएशन के संविधान में दर्शाया है कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होते ही नई कार्यकारिणी प्रभार ग्रहण कर लेती है। एक सप्ताह के भीतर प्रभार सौंपना अनिवार्य है। चूंकि चुनाव संचालक बी श्रीनिवास राव एवं सह संचालक डी प्रभाकर अनुपस्थित थे इसलिए एक अन्य चुनाव सह संचालक एनवी श्रीनिवास राव ने गलती मानते हुए नई कार्यकारिणी को प्रमाणपत्र जारी किया है।

Posted By: Kadir Khan

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