रायपुर (राज्य ब्यूरो)। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला अपने बयान के कारण विवादों में आ गए हैंं। दो दिन पहले हुए वेबिनार के जरिये उन्होंने शिक्षकों को खरी-खोटी सुनाते हुए निकम्मा तक कह डाला था। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो शिक्षक नहीं पढ़ा सकते, उनकी सर्विस बुक में ही अयोग्य लिख दिया जाए। जिनके पढ़ाए हुए 80 प्रतिशत बच्चे फेल हो रहे हैं, उन्हें पदोन्न्ति के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया जाए। उन्होंने शिक्षकों से पूछा कि आप ही बताएं कि क्या करना चाहिए, वेतन रोकें या चेतावनी दें।

इस पूरी बातचीत का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होते ही शिक्षकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। बता दें कि दो दिन पहले ही स्कूल शिक्षा के प्रमुख सचिव डा. शुक्ला वेबिनार के जरिये शिक्षकों से सीधे मुखातिब हुए थे। इस मामले में डा. शुक्ला ने नईदुनिया से कहा कि हर सवाल का जवाब मैं नहीं दे सकता। मैंने जो भी कहा है, वह वेबिनार के मंच पर कहा है।

शिक्षकों को दोषी ठहराने से समाधान नहीं: शिक्षक संघ

इधर, छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष ओंकार सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रमुख सचिव ने पूरा दोष शिक्षकों पर मढ़ दिया है, जो आपत्तिजनक है। शिक्षा को प्रभावित करने वाले बहुत से उत्तरदायी कारण हैं, जिन पर गहन चिंतन होना चाहिए। केवल शिक्षकों को दोषी ठहरा देने से न तो समाधान मिलेगा और न ही ये उच्चाधिकारी अपने उत्तरदायित्वों से बच पाएंगे।

संघ ने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने ही शिक्षक चयन की प्रक्रिया इतनी जटिल बनाई है कि हायर सेेकेंडरी, स्नातक, डीएलएड, बीएड, फिर पात्रता परीक्षा और उसके बाद प्रतियोगी परीक्षा होती है। संघ का कहना है कि अफसर इतना छानकर पानी पी रहे हैं, फिर भी यदि गंदा पानी मिल रहा है, इसके लिए जिम्मेदार कौन है, यह चिंता का विषय है।

इनाम मिले तो साहब की मेहनत और गुणवत्ता खराब तो शिक्षक दोषी

छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि यदि कोई इनाम मिलता है तो प्रमुख सचिव अपनी मेहनत बताते हैं और शिक्षा का स्तर खराब होता है तो दोष केवल शिक्षकों पर मढ़ा जाता है। स्कूलों को प्रयोगशाला और बच्चों को प्रायोगिक सामग्री समझने वाले अफसरों ने ही स्कूलों की गुणवत्ता का कबाड़ किया है। शिक्षक यदि निकम्मे हैं तो आपको वाहवाही किस बात पर मिलती है? गैर शैक्षणिक कार्य और अनावश्यक प्रयोग बंद हो।

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