रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

प्रदेश के बड़े निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान राहत नहीं मिलने के बाद पूरी तरह खराब हो चुके फेफड़े का सरकारी अस्पताल में सफल इलाज किया गया है। वहीं मरीज को पूरी तरह स्वस्थ कर गुरुवार को डिस्चार्ज भी कर दिया गया।

मामले में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के पुत्र प्रमोद कुमार कंवर को चार महीने पहले टीबी के कारण सांस लेने में दिक्कत आने लगी थी। ट्यूबर कुलोसिस के कारण बायां फेफड़ा खराब हो चुका था। इसे मेडिकल भाषा में ब्रोन्कोप्लुरल फिस्टुला विद पायोथोरेक्स एंड फाइब्रोसिस ऑफ लंग्स कहते हैं। इस बीमारी में टीबी के कारण फेफड़ा पूर्णतः खराब होकर मवाद से भर जाता है, वहीं साथ में सिकुड़ कर पत्थर जैसे कड़ा हो जाता है। इसकी वजह से फेफड़ों में बड़े छेद भी हो जाते हैं।

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ऑपरेशन में था रिस्क, इस तरह पूरी की प्रक्रिया

डॉ. आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि आंबेडकर अस्पताल में इलाज के लिए आए तो डॉ. पंडा के संरक्षण में इलाज चला एवं उन्होंने हार्ट चेस्ट और वैस्कुलर (सीटीवीएस) विभाग में सर्जरी के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. केके साहू के पास रेफर किया। रेडियोलॉजी विभाग में डॉ. एसबीएस नेताम की देखरेख में सीटी स्केन देखकर पता चला कि इसका इलाज सिर्फ ऑपरेशन से ही संभव है। चूंकि यह सर्जरी हाई रिस्क कैटेगरी में आता है। ऑपरेशन में बाएं सीने को खोलकर फेफड़ों को ठीक करके अलग किया गया और फिर फेफड़े के छेद को विशेष स्टेपलर की मदद से बंद किया गया। ऑपरेशन के 12 दिन बाद मरीज को स्वास्थ कर डिस्चार्ज किया गया है।

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निजी अस्पतालों से बेहतर सुविधा

विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने कहा कि यदि चिकित्सक और स्टॉफ अपने कार्य के प्रति समर्पित हों तो सरकारी अस्पतालों में भी निजी अस्पतालों की तुलना में कई गुना बेहतर इलाज होता है। यहां पर 24 घंटे दक्ष डॉक्टरों की टीम होती है जो कहीं अन्य जगह नहीं मिलती। सरकारी अस्पताल में कार्य करने वाले किसी भी सर्जन एवं फिजिशियन का अनुभव अन्य प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि यहां पर हर वह केस आता है जो बाकी अस्पतालों से रिजेक्ट होता है। सरकारी अस्पताल में वेटिंग ज्यादा होता है परंतु कार्य अच्छा होता है।

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मुझे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- यहां न कराएं इलाज

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने नईदुनिया के चर्चा में बताया कि काफी समय से निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे, इसलिए पैसे की दिक्कत आने लगी थी। जब आंबेडकर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाला था, तो पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने यहां व्यवस्था को देखते हुए न जाने की सलाह दी थी, बावजूद इसके अस्पताल में आया और यहां के डॉक्टरों ने बेहतर इलाज किया है। कंवर ने स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव से स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त करने की अपील की है, ताकि गरीबों को भी इलाज के लिए भटकना न पड़े।

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