रायपुर। आम लोगों से सीधी मुलाकात करके उनकी समस्याओं का निराकरण करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जनचौपाल कार्यक्रम चला रहे हैं। कई समस्याओं का मौके पर ही निराकरण कर देते हैं, तो कुछ को निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों के पास भिजवा देते हैं।

मुख्यमंत्री के प्रयास और जनचौपाल कार्यक्रम पर नीचे के अधिकारी-कर्मचारी बट्टा लगा रहे हैं। ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों पर मुख्यमंत्री सख्ती करने की तैयारी में हैं, क्योंकि उनके निर्देश के बाद भी निचले स्तर पर लोगों का काम नहीं हो रहा है। बुधवार को जनचौपाल में कई ऐसे लोग मिले, जो मुख्यमंत्री बघेल की जनचौपाल में पहले अर्जी देकर जा चुके थे, काम नहीं होने के कारण उन्हें फिर से आना पड़ा।


केस-1

कबीरधाम जिले के महका ग्राम निवासी सीताराम ने बताया कि वे 30 सितंबर को पटवारी रिकॉर्ड दुस्र्स्त कराने और सहायता राशि का आवेदन लेकर सीएम हाउस पहुंचे थे। उन्हें लिखकर दिया गया था कि उनके आवेदन का प्राथमिकता के साथ परीक्षण कर कार्रवाई की जाए। जिला स्तर के अधिकारियों ने उसके बाद भी काम नहीं किया। उन्हें दोबारा आवेदनों की प्रति लेकर आना पड़ा।


केस-2

रायपुर के न्यू चंगोराभाठा निवासी प्रदीप वर्मा ने बताया कि 14 अगस्त को जनचौपाल में प्रधानमंत्री आवास योजना का आवेदन लेकर पहुंचे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया था कि नगर निगम ने उन्हें आवास आवंटित करने के बाद निरस्त कर दिया। मुख्यमंत्री ने निगम आयुक्त को परीक्षण कर कार्रवाई के लिए लिखा था, लेकिन उसे लेकर निगम पहुंचे तो कोई सुनवाई नहीं हुई।


केस-3

रायपुर निवासी अब्दुल रज्जाक ने बताया कि उनके पिता के नाम पर तखतपुर में जमीन थी। पिता की मृत्यु के बाद उनकी जमीन को नजूल रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया। उसके बाद उसे कब्रिस्तान के लिए दे दिया गया। 14 अगस्त को जनचौपाल में मुख्यमंत्री ने परीक्षण के लिए लिखा था, जिसे लेकर वे बिलासपुर कलेक्टर से लेकर पटवारी तक गए। किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।