रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रायपुर तहसील सहित अन्य तीनों विकासखंडों में भू-अभिलेख आनलाइन करने की प्रक्रिया कागजों तक ही सीमित रह गई है। नतीजतन एक क्लिक में न तो राजस्व रिकार्ड मिल पा रहा है। तीन वर्ष पहले शासन की ओर से एक करोड़ रुपये जारी किए गए, लेकिन अब तक इनके लिए सिर्फ काम्पैक्टर ही स्थापित कर पाए हैं। दस्तावेजों की बार कोडिंग, स्कैनिंग तक नहीं हो पाई है। पुराने अभिलेखों की कम्प्यूटरीकृत कापी भी तैयार नहीं हो पाई है।

इसकी मूल वजह है कि इस कार्य के लिए अब तक एजेंसी ही तय नहीं हो पाई है, जबकि इसके लिए स्वीकृत की गई राशि का 40 प्रतिशत यानी एक करोड़ रुपये में से चालीस लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके तहत अब तक सिर्फ चारों तहसीलों में सिर्फ काम्पैक्टर ही लगवाए गए हैं और रूम बनाया गया है। इसके अलावा अन्य कोई कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इसकी वजह से दस्तावेजों को निकालने से लेकर खोजने में भी अफसरों को परेशान होना पड़ रहा है।

बायोमैट्रिक दरवाजे व कम्प्यूटर तक नहीं

शासन द्वारा दी गई राशि से सभी तहसीलों में एक नया रिकार्ड रूम बनाया जाना था, जिसमें बायोमेट्रिक दरवाजे के साथ ही कम्प्यूटर भी लगवाए जाने हैं। अब तक तहसीलों में सिर्फ अलग कमरा ही बनवाया गया है। न तो बायोमेट्रिक दरवाजे लगवाए गए हैं और न ही कम्प्यूटर की खरीदी हो पाई है।

साफ्टवेयर में एंट्री से लेकर अग्निशमन बंदोबस्त भी नहीं

सभी तहसीलों में दस्तावेजों की साफ्टवेयर में एंट्री भी की जानी थी। साथ ही अग्निशमन के बंदोबस्त भी किए जाने थे, लेकिन अब तक किसी भी तहसील में न तो अग्निशमन का कार्य पूरा हो पाया है और न ही साफ्टवेयर में ही एंट्री हो पाई है। इसकी वजह से यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई है।

रायपुर कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद भुरे ने कहा, इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। काम्पैक्टर वगैरह पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि अन्य कार्य अब शुरू किया जा रहा है। सभी तहसीलों में ही रिकार्ड आनलाइन किए जाने हैं। जल्द ही इसकी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

जानिए, जिले में किस तहसील में कितनी राशि हुई खर्च

रायपुर 7 लाख

तिल्दा 10 लाख

आरंग 7.29 लाख

अभनपुर 14.76 लाख

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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